नरेंद्र और उनके परिवार के अनुसार राधा के आने के बाद उनके जीवन में बड़े बदलाव हुए। नरेंद्र का कारोबार तेजी से आगे बढ़ने लगा। परिवार की अन्य समस्याएं भी दूर हो गई। जिसके बाद से राधा उनके परिवार का हिस्सा ही नहीं वे सब उसके भक्त भी हो गए। नरेंद्र का परिवार राधा की विशेष देखभाल करता है। उसे खाने में देसी घी के लड्डू दिए जाते हैं। साथ ही कभी सूखा चारा भी खिलाया जाता है। इनता ही नहीं राधा नरेंद्र के परिवार के साथ उनके बंगले में रहती है और खाना भी उनके साथ ही खाती है।
नरेंद्र पुरोहित के परिवार में उनकी पत्नी विमला पुरोहित, दो बेटे परेश व अभिजीत और दो बेटियां सपना व निकिता हैं। सभी मिलकर रोजाना राधा की आरती करते हैं। नरेंद्र मुंबई में बीएमसी में कांट्रैक्टर (ठेकेदार) हैं। उनका इलेक्ट्रिक टू व्हीकल्स की मैन्युफैक्चरिंग का करोबार है। जिसके सिलसिले में नरेंद्र को अक्सर शहर के बाहर जाना पड़ता है। नरेंद्र घर में हो या बाहर राधा के दर्शन किए बिना भोजन तक नहीं करते हैं, घर से बाहर होने पर वह वीडियो कॉल कर राधा को देखते हैं।
दो साल की बछिया लाए थे करोबारी नरेंद्र।
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नरेंद्र ने करीब दो साल पहले जालोर में एक करोड़ से अधिक का एक बंगला बनवाया है। इस बंगले में परिवार के सभी सदस्यों के अलावा राधा के लिए भी एक विशेष जगह है, जहां वह रहती हैं। हालांकि, राधा पूरे बंगले में घूमती रहती है, जिस कमरे में मन होता है चली जाती है और जहां मन करता है, वहां बैठ जाती है। नरेंद्र के यहां आने के बाद राधा तीन बछियों को जन्म दे चुकी है। उनके नाम गोपी, मीरा और सोमा रखे गए हैं। राधा रोजाना दस लीटर दूध देती है, जिसमें से परिवार के लोग सिर्फ ढाई लीटर ही उपयोग करते हैं। बाकी सबसे छोटी बछिया के लिए छोड़ दिया जाता है।