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राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अशोक गहलोत को दे सकती है इनाम

Fri, 28 Sep 2018 08:43 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला
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अशोक गहलोत और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)
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शांति से सौम्यता के साथ हर चुनौती पर खरे उतरने वाले अशोक गहलोत को कांग्रेस मुख्यालय में जादूगर भी कहा जाता है। यह कोई अतिसयोक्ति नहीं है, लेकिन कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत ने राजस्थान में अपनी अहमियत बनाए रखी है।

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बताते हैं अब इसका आभास कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को भी होने लगा है। मिल रही रिपोर्ट में कांग्रेस अध्यक्ष मानने लगे हैं कि बिना अशोक गहलोत के राजस्थान की राजधानी जयपुर में कांग्रेस की डगर काफी मुश्किल है। 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक अशोक गहलोत को जल्द ही इसका इनाम मिलने वाला है। राजस्थान विधानसभा चुनाव में परचम फहराने के लिए गहलोत को प्रचार अभियान समिति का प्रमुख भी बनाया जा सकता है। राहुल गांधी चाहते हैं कि अशोक गहलोत राजस्थान का अहम चेहरा बने रहें।
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गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के बीच अच्छा समन्वय बनाकर सीपी जोशी, डॉ. गिरजा व्यास समेत तमाम नेताओं की एकजुटता से राजस्थान विधानसभा चुनाव में जीत की सुनिश्चितता बनाई जा सके। इस समय गहलोत राहुल गांधी के बेहद करीब हैं। वह उनके सलाहकारों में गिने जाने लगे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष का गुजरात विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार अशोक गहलोत पर विश्वास बढ़ा है। राजस्थान में भी अशोक गहलोत की जड़ें काफी गहरी हैं। वह हर जाति, वर्ग के नेता हैं। इतना ही नहीं वसुंधरा खेमे के नेताओं का भी मानना है कि अशोक गहलोत के सामने आने के बाद राज्य में चुनाव का मुकाबला काफी रोचक हो जाएगा। 

 

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हरियाणा और महाराष्ट्र में भी कांग्रेस करेगी फेरबदल

कांग्रेस पार्टी एक और बड़ा कदम जल्द उठा सकती है। पार्टी को अभी तीन महासचिव बनाने हैं। इसमें महाराष्ट्र में कांग्रेस पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौह्वाण का नाम आगे चल रहा है। पृथ्वीराज के अलावा हरियाणा में भी नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद का कांग्रेस पटाक्षेप करना चाहती है। हरियाणा में कांग्रेस पार्टी के चार खेमे हैं। एक खेमा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा का है, यह सबसे ताकतवर है।

इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, पूर्व केन्द्रीय मंत्री कु. शैलजा और रणदीप  सुरजेवाला का खेमा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इनमें भी एकजुटता और समन्वय के साथ राजनीतिक अभियान चलाने का वातावरण चाहते हैं। इस क्रम में बिना पार्टी का कोई एक चेहरा घोषित किए वह कांग्रेस पार्टी को सत्ता में वापस लाने का समीकरण बना रहे हैं। बताते हैं इस समीकरण में हुड्डा फैक्टर काफी प्रभावी है।
 
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