कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने गुजरात पोर्ट में 3000 किलोग्राम हेरोइन जब्ती के मामले में न्यायिक जांच की मांग की है। इसकी कीमत 21 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जोधपुर में प्रेस कांफ्रेंस में एक वीडियो दिखाते हुए दिग्विजय ने आरोप लगाया कि इसमें शामिल कुछ लोग भाजपा से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने ये भी पूछा कि सरकार बताए कि इन लोगों के खिलाफ नारकोटिक ड्रग एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) एक्ट के तहत क्या कार्रवाई हुई है।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय ने यह भी कहा कि नशीली दवाओं की जब्ती से संबंधित मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी गई है, लेकिन संगठन पर भरोसा करना मुश्किल है क्योंकि इसने हर उस व्यक्ति को बरी करने का काम किया है जिसका संबंध भाजपा से था।
सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि हमें एनआईए पर भरोसा नहीं है। मोदी-शाह के शासन में एजेंसी ने हर उस व्यक्ति को बरी करने के लिए काम किया है, जिसका भाजपा से संबंध था और जो आतंकवादी गतिविधियों में शामिल था।
उन्होंने कहा कि ऐसे अधिवक्ता एनआईए में तैनात हैं जो अभियोजन के बजाय उन्हें बरी करने के लिए बहस करते हैं। हमने मांग की कि जब्त ड्रग के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा की जानी चाहिए।
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव एआईसीसी के निर्देश पर इस मुद्दे को उठाने के लिए यहां आए थे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी आतंकवाद से ज्यादा गंभीर मुद्दा है क्योंकि यह देश के युवाओं को तबाह कर देता है।
उन्होंने कहा कि इसी तरह की 25,000 किलोग्राम हेरोइन की खेप इस साल जून में भी गुजरात में जब्त की गई थी।
राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआीरआई) ने हाल ही में लगभग 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की है। जब्ती के बाद, जांच का दायरा आंध्र प्रदेश तक बढ़ा दिया गया क्योंकि विजयवाड़ा के एक दंपति ने इस खेप का आयात किया था।
इस संबंध में आशी ट्रेडिंग कंपनी को आयात करने वाली फर्म के रूप में पहचाना गया था और आरोप है कि इसे एम सुधाकर और उनकी पत्नी जी दुर्गा पूर्णा वैशाली द्वारा संचालित किया जाता है। दोनों को चेन्नई से गिरफ्तार कर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।