नाराज विधायकों ने कहा हमारा समर्थन गहलोत सरकार के साथ।
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दिल्ली पहुंचे बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए राजस्थान के विधायकों के सुर अब बदलने लगे हैं। एक दिन पहले ही दिल्ली आए 4 असंतुष्ट विधायकों ने अब यह कहा है कि वो गहलोत सरकार के साथ हैं और सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बारे में राय लेने दिल्ली पहुंचे हैं। उनका पूरा समर्थन गहलोत सरकार के साथ बना हुआ है।
दिल्ली में विधायकों ने डाला डेरा
बहुजन समाज पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए 6 में से 4 विधायक राजेंद्र गुढ़ा, वाजिब अली, संदीप यादव और लाखन सिंह बुधवार को ही दिल्ली पहुंचे थे। बसपा से कांग्रेस में विलय के मामले में इन विधायकों को अब दल बदल कानून के तहत अपनी सदस्यता जाने का डर सताने लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें दल बदलने से संबंधित रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसके अलावा चारों विधायक मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से भी नाराज चल रहे थे। कहा जा रहा है कि विलय के समय इन्हें मंत्री पद का भरोसा दिया गया था। विधायकों के दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से भी मिलने के कयास लगाए जा रहे थे।
गहलोत से बात करने के बाद हुए नरम
बताया जा रह है कि चारों विधायकों से मुख्यमंत्री गहलोत ने फोन पर बात की और उनकी नाराजगी का कारण पूछा था। विधायकों ने किसी हालत मेंं अपनी सदस्यता बचाए रखने की बात कही। गहलोत के आश्वासन के बाद विधायकों ने अपने रुख में नरमी लाई और बताया कि वो दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बारे कानूनी राय लेने पहुंचे हैं। उनका पूरा समर्थन गहलोत सरकार के साथ बना हुआ है।
2019 में हुए थे कांग्रेस में शामिल
मुख्यमंत्री गहलोत ने साल 2019 में ही बसपा के सभी 6 विधायकों का कांग्रस में विलय करा दिया था। इस विलय को अगले ही दिन विधानसभा अध्यक्ष की मंजूरी मिल गई थी। बसपा ने दल बदल कानून का हवाला देते हुए इस विलय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। तब से यह मामला कोर्ट के अधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी 6 विधायकों को 25 अक्तूबर से पहले जवाब पेश करने के लिए नोटिस जारी किया है। जिसके बाद से ही विधायकों को अपनी सदस्यता जाने का डर है।