निखिल गांधी ने धारण किया लड़की का रूप।
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निखिल गांधी का दुल्हन की तरह शृंगार किया गया। इसमें उन्हें करीब 5 घंटे का समय लगा और इसके बाद वे देर रात करीब 10 बजे फगड़ा घुड़ला मेले में पहुंचे। बतादें कि फगड़ा घुड़ला मेले के लिए हर साल किसी एक लड़के को लड़की जैसा शृंगार करवाने के लिए सिलेक्ट किया जाता है। लड़की बनने वाले निखिल का पुश्तैनी परफ्यूम का कारोबार है। निखिल ने कहा कि इस संस्कृति को बचाए रखने और परंपरा के तहत जब मेरा सिलेक्शन हुआ तो मैंने तुरंत घुड़ला उठाने के लिए हां कर दी।
इस तरह से करते हैं सिलेक्ट
फगड़ा घुड़ला मेले में जो युवक महिला बनता है उसे शृंगार कर घुड़ला ऊंचा कर चलना होता है। इसके लिए शहर के युवाओं से फोटो मांगे जाते हैं। इसके बाद बेहतरीन फोटो के आधार पर फगड़ा घुड़ला कमेटी महिला बनने वाले युवक का सिलेक्शन करती है। इस बार 100 से ज्यादा युवाओं ने अपनी तस्वीरें भेजीं थी। जिनमें से कुछ लोगों को सिलेक्टर कर इंटरव्यू के लिए बुलाया, लेकिन सिलेक्शन निखिल गांधी का हुआ। सिलेक्शन के बाद निखिल को घुड़ला ऊंचा कर चलने की प्रैक्टिस भी करवाई गई थी।
3 किलो सोने की ज्वेलरी
इस मेले में महिला बनने वाले पुरुष को करीब 3 किलो तक सोने के गहने पहनाए जाते हैं। निखिल को भी इतने ही गहने पहनाए गए। ज्वेलरी में सजे निखिल पूरे मेले के दौरान आकर्षण का केंद्र रहे। निखिल ने कहा कि इस ट्रेडिशन का हिस्सा बनकर वे काफी खुश हैं। साल 1969 में सर्वप्रथम लेखराज ने महिला का वेश धरा था। इसमें नैनसा ने घुड़ला उठाया। मेले की शुरुआत के सहयोगी राम भजन गांधी, हरिशंकर गांधी, हंसराज गांधी, रामस्वरूप गांधी हैं। वर्तमान में इसके अध्यक्ष भगवतीलाल शर्मा है।
बारिश की वजह से देर रात शुरू हुई शोभायात्रा
इस बार 55वां फगड़ा घुड़ला मेले का आयोजन हुआ। शुक्रवार शाम करीब 7 बजे ये शोभायात्रा निकलनी थी, लेकिन बारिश के चलते रात 10:30 बजे ओलिंपिक रोड से इसकी शुरुआत हुई। जो जालोरी गेट, खांडा फलसा, आड़ा बाजार, कटला बाजार से होते हुए नई सड़क पर देर रात विसर्जित हुई। विसर्जन के बाद मध्यरात्रि में पुन: इसी रास्ते गवर माता अपने स्थान पर पहुंची। इस मौके पर राखी हाउस पर गणगौर माता का खांडा फलसा, कुम्हारिया कुआं व आडा बाजार गणगौर समिति द्वारा प्रसाद चढ़ाया गया। वहीं राखी हाउस गणगौर समिति द्वारा इनके ईसरजी का पूजन कर प्रसाद चढ़ाया गया। इसके बाद गवर माता को मंदिर में विराजित किया गया। इस मेले की खास बात ये है कि जो युवक लड़की बनता है वह मेले के सबसे आखिर में लोटिया उठाकर चलता है।
मनाया गया था विजयी उत्सव
- जोधपुर की स्थापना करने वाले राव जोधा के पुत्र राव सातल ने वर्ष 1545 में मारवाड़ की गद्दी पर बैठे। इनके दो पुत्र थे दूदाजी व परसिंह।
- इनके राज में अजमेर के शाही सूबेदार मीर घुड़ले खान, मल्लू खान व सीरिया खान ने बड़ी सेना लेकर जोधपुर के पीपाड़ में हमला कर दिया।
- इस शाही सेना ने पीपाड़ में भारी लूटपाट कर महिलाओं को किडनैप किया और रवाना हो गए।
- सूचना मिलने पर राव सातल ने अपने दोनों पुत्रों के साथ मिलकर शाही सेना पर कोसाणा के निकट हमला बोला।
- इस युद्ध में राव सातल ने घुड़ले खान को मार कर महिलाओं को मुक्त कराया, लेकिन खुद मारे गए।
- युद्ध के बाद घुड़ले खान का सिर जोधपुर लाया गया और मारवाड़ में विजयी उत्सव मनाया गया।