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Rajasthan: बीकानेर के फुलझड़ी उद्योग पर जीएसटी की मार, पहले हुआ करती थी दस फैक्टरी; अब रह गई तीन

Thu, 24 Oct 2024 06:33 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर

सार

Rajasthan: जीएसटी की मार से बीकानेर में बनने वाले फुलझड़ियों की चमक-दमक इस बार कुछ कम हो सकती है। बढ़ी हुई जीएसटी की दरों ने पटाखा बाजार की कमर तोड़कर रख दी है। पटाखा बाजार बीते साल के मुकाबले कई गुना तक महंगा होगा।
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बीकानेर के फुलझड़ी उद्योग पर जीएसटी की मार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीकानेर के फुलझड़ी बनाने वाले व्यापारियों का कहना है कि कहना है कि अब तक पटाखा-आतिशबाजी पर 14 फीसदी टैक्स लगता था, जो जीएसटी के बाद 18 फीसदी हो गया है। थोक पटाखा कारोबार से जुड़े वीरेंद्र किराडू ने बताया कि बीकानेर संभाग में पहले दस फुलझड़ी, पटाखों की फैक्टरियां हुआ करती थी।

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प्रतिस्पर्धा के चलते अब तीन ही रह गई है। उसका बड़ा कारण यह है कि जो बड़ी फैक्टरियां थी, जिनका टर्न ओवर एक करोड़ से ऊपर था और जो मध्यम छोटी फैक्टरियां थी, उन पर भी 18 प्रतिशत जीएसटी लागू कर दिया, जिससे छोटी फैक्टरियां लगभग बंद ही हो गई।

उन्होंने बताया कि बड़े व्यापारी आमतौर पर अधिक संसाधनों और नेटवर्क के साथ काम करते हैं, जिससे उन्हें कीमत को नियंत्रित करने में मदद मिलती है, हालांकि 18% जीएसटी की दर उनके लिए भी एक बोझ है, क्योंकि यह उनके मुनाफे को भी प्रभावित कर रहा है। इसके विपरीत छोटे व्यापारी पहले से ही सीमित संसाधनों और बाजार में प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे थे, उन्हें जीएसटी दरों के कारण लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसे उनकी फैक्टरियां में ताले लग गए। सरकार को चाहिए के इन छोटी फैक्टरी को कुटीर उद्योग का दर्जा देकर जीएसटी में रियायत दी जाए, ताकि इस व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी बच सके। 
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इस बार 30 से 35 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं आतिशबाजी के दाम
सालभर पहले छोटे अनार के पैकेट की कीमत 50 रुपये थी, जो अब 90 रुपये पहुंच गई है। 20 रुपये में बिकने वाले छोटी चकरी के पैकेट 55 रुपये में बिक रहे हैं। कारोबारियों ने बताया कि थोक पटाखा सप्लाई में देश की सबसे बड़ी मंडी माने जाने वाले तमिलनाडु के शिवकाशी जिले में भी जीएसटी का असर दिख रहा है। यहां से देश के 85 फीसदी हिस्सों में होने वाली थोक पटाखा सप्लाई की कीमत में भी इजाफा हुआ है।

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