आरक्षण की मांग को लेकर जाटों का महापड़ाव
- फोटो : अमर उजाला
भरतपुर में जाट समाज द्वारा केंद्र में आरक्षण की मांग को लेकर जाट समाज ने बुधवार से भरतपुर के उच्चैन तहसील के गांव जयचौली रेलवे स्टेशन के पास महापड़ाव शुरू कर दिया है। जाट समाज के लोग टेंट गाड़कर बैठ गए हैं। समाज के लोगों का महापड़ाव पर आना भी शुरू हो गया है। आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार महापड़ाव पर मौजूद हैं। संघर्ष समिति के संरक्षक पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह भी महापड़ाव स्थल पर आ सकते हैं।
भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक नेम सिंह फौजदार ने केंद्र सरकार को 10 दिन का समय दिया। नेम सिंह फौजदार ने सात जनवरी को हुंकार सभा में कहा था कि भरतपुर-धौलपुर के जाटों को आरक्षण नहीं दिया तो 17 जनवरी को जयचौली (भरतपुर) गांव के पास दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर महापड़ाव डाला जाएगा। अगर सरकार नहीं मानी तो दूसरा पड़ाव बेडम गांव (भरतपुर) और तीसरा रारह (भरतपुर) में होगा। दूसरे और तीसरे पड़ाव की तारीख अभी तय नहीं है। पहले रेल रोकेंगे, इसके बाद रोड जाम करेंगे।
2015 में केंद्र से ख़त्म किया था आरक्षण
भरतपुर और धौलपुर जिले के जाटों को केंद्र में आरक्षण दिए जाने की मांग 1998 से चली आ रही है। 2013 में केंद्र की मनमोहन सरकार ने भरतपुर और धौलपुर जिलों के साथ अन्य नौ राज्यों के जाटों को केंद्र में ओबीसी का आरक्षण दिया था। 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी तो सुप्रीम कोर्ट का सहारा लेकर 10 अगस्त 2015 को भरतपुर-धौलपुर के जाटों का केंद्र और राज्य में ओबीसी आरक्षण खत्म कर दिया गया। लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 23 अगस्त 2017 को पूर्ववर्ती वसुंधरा राज में दोनों जिलों के जाटों को ओबीसी में आरक्षण दिया गया। लेकिन केंद्र ने यह आरक्षण नहीं दिया।
पूर्व सीएम आरक्षण के लिए केंद्र में कर चुके हैं सिफारिश
सितंबर 2021 में जब जाट समाज ने चक्का जाम का एलान किया था। तब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 28 दिसंबर 2021 को दोनों जिलों के जाटों को केंद्र की ओबीसी में आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार को सिफारिश पत्र लिखा था। उसके बाद आरक्षण संघर्ष समिति ने दिल्ली ओबीसी कमीशन से मिली। केंद्र सरकार के मंत्रियों से भी मुलाकात की, लेकिन आरक्षण नहीं मिल सका।