इलाज के बाद ठीक हुआ बच्चे का पैर।
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हजारों नवजात बच्चों में से एक बच्चे को पैर के टेढ़ेपन यानी क्लब फुट की बीमारी होती है। यह दुर्लभ बिमारियों में से एक है। इस बीमारी से ग्रसित अधिकांश बच्चे आजीवन दिव्यांग का जीवन जीने के लिए मजबूर हो सकते हैं। बच्चों के बड़े होने पर इसका इलाज मुश्किल हो जाता है और ऑपरेशन का विकल्प भी नहीं बन पाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का मानना है कि ऐसे लक्ष्णों वाले बच्चों का उपचार समय रहने हो जाना चाहिए। इससे उन्हें दिव्यांग बनने से बचाया जा सकता है।
जोधपुर जिले की पीपाड़ सिटी राजकीय जिला चिकित्सालय में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। यहां 11 महीने पहले जन्मा बच्चा इसी बीमारी से पीड़ित था। स्थानीय चिकित्सालय में कार्यरत अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बच्चे में जन्मजात बीमारी को देखा तो उन्होने परिजनों को इलाज कराने की समझाइश दी। इसके बाद डॉ. राजेन्द्र चौधरी ने बच्चे का उपचार करना शुरू किया। 11 महीने की मेहनत के बाद बच्चे के पैर एक दम ठीक हो गए हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेंद्र सिंह परिहार ने बताया कि ग्राम घाणामगरा निवासी ओमप्रकाश के पुत्र हंसराज को जन्मजात पैर के टेढ़ेपन की बीमारी थी। ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने बच्चे का सफल उपचार किया है। बच्चे के ठीक होने पर उसके माता पिता भी काफी खुश हुए हैं। उनकी आंखों से आंसू छलक आए।