पिता ने खरीदकर दिया घोड़ा
एक समय ऐसा भी था कि दिव्यकृति के पास प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए घोड़ा नहीं था। ऐसे में बेटी और उसके हुनर को आगे बढ़ाने के लिए उनके पिता विक्रम सिंह ने उन्हे जर्मनी से घोड़ा खरीदकर दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की।
अब यूरोप में रहती हैं दिव्यकृति
दिव्यकृति ने देश में होने वाली कई हॉर्स राइडिंग प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया है। साल 2020 में वह यूरोप में शिफ्ट हो गईं। एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन के लिए दिव्यकृति ने एक साल डेनमार्क और 2 साल जर्मनी में भी ट्रेनिंग ली थी। एशियन गेम्स-2023 में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने सुर्खिया बंटोरीं थी।
पिता पोलो क्लब से जुड़े
दिव्यकृति का परिवार जयपुर में रह रहा है। उनके परिवार में माता-पिता और एक बड़ा भाई हैं। उनके पिता विक्रम सिंह पोलो क्लब जयपुर से जुड़े हुए हैं। वर्तमान में दिव्यकृति यूरोपीय देश ऑस्ट्रिया में रह रही हैं और वहां ट्रेनिंग कर रही हैं।