आनंद गिरि मूल रूप से राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के सरेरी गांव का रहने वाला है। उसका असली नाम अशोक चोटिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अशोक सातवीं कक्षा में था तब बिना किसी को बताए घर से चला गया था। इसके 12 साल बाद वह आनंद गिरि बनकर घर लौटा था। नरेंद्र गिरि की हत्या में आनंद का नाम आने के बाद उसके परिजन और बचपन के दोस्त हैरत में हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आनंद गिरि के बचपन के दोस्तों का कहना है कि वह बचपन से ही उसका झुकाव आध्यात्म की ओर था। वह न तो किसी से ज्यादा बात करता था और न ही उसका व्यवहार सामान्य बच्चों के जैसा था। उसके दोस्तों के अनुसार 12 साल बाद मिलने के बाद उसके स्वरूप और हाव-भाव में तो बदलाव आया था लेकिन उसका स्वभाव अभी भी पहले जैसा ही था।
योग में पीएचडी, 15 से अधिक भाषाओं का ज्ञान
गिरि पर लगे आरोपों को लेकर उसके बचपन के दोस्तों का कहना है कि वह ऐसा कर ही नहीं सकता। उनका कहना है कि आनंद अपने गुरु को सबकुछ मानता था। वह उन्हीं की हत्या नहीं कर सकता है। उल्लेखनीय है कि आनंद गिरि के पास योग शिक्षा में पीएचडी भी है, जिसके चलते उसे योग गुरु के तौर पर भी जाना जाता है। इसके साथ ही उसे उसे 15 से अधिक भाषाओं का ज्ञान है।
कई देशों में योग प्रशिक्षण दे चुका है आनंद गिरि
इसके अलावा आनंद गिरि कई देशों की यात्रा कर चुका है और वहां जाकर योग का प्रशिक्षण दे चुका है। उसने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, तुर्की, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों की यात्रा कर चुका है। इसके अलावा साल 2013 में उसके एक किताब भी लिखी थी। इस किताब का नाम स्वर्ण भूमि प्रयाग था। वह कई विश्वविद्यालयों में अतिथि फैकल्टी के तौर पर योग का प्रशिक्षण भी दिया करता था।