अलवर के नगर निगम के महापौर चुनाव से निर्दलीय प्रत्याशी रिंकल गर्ग के नाम वापस लेने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला तय हो गया है। भाजपा ने वार्ड 7 की पार्षद सुमनलता अग्रवाल को अपना प्रत्याशी बनाया है, वहीं कांग्रेस की ओर से वार्ड 39 की पार्षद कमलेश शर्मा चुनाव मैदान में ताल ठोक रही हैं। 21 सितंबर को होने वाले मतदान के जरिये नए महापौर का चुनाव होगा। नाम वापसी के साथ ही चुनावी तस्वीर साफ हो चुकी है और दोनों प्रमुख दल पूर्ण बहुमत का आंकड़ा जुटाने की कवायद में जुट गए हैं।
दोनों के पति अपनी पार्टियों के नेता
दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने वरिष्ठ नेताओं के परिजनों पर भरोसा जताया है। भाजपा उम्मीदवार सुमनलता अग्रवाल पूर्व नगर परिषद सभापति अजय अग्रवाल की पत्नी हैं। दूसरी तरफ, कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश शर्मा पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेश मिश्रा की पत्नी हैं। दोनों प्रत्याशियों ने 16 सितंबर को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। उसी दिन वार्ड 36 से पार्षद का चुनाव हार चुकीं रिंकल गर्ग ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में महापौर पद के लिए पर्चा भरा था। उनके पर्चा वापस लेने से अब मैदान में केवल दो ही उम्मीदवार शेष बचे हैं, जिससे दोनों दलों का ध्यान सीधे पार्षदों के समर्थन पर केंद्रित हो गया है।
33 पार्षदों के समर्थन की जरूरत
अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्ड हैं और महापौर की कुर्सी हासिल करने के लिए कम से कम 33 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता है। हालिया चुनाव परिणामों में भाजपा 28 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, जबकि कांग्रेस के खाते में 23 सीटें आई हैं। इसके अतिरिक्त 13 निर्दलीय और एक बहुजन समाज पार्टी का पार्षद चुनाव जीतकर आया है। किसी भी दल के पास अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण निर्दलीय और अन्य पार्षदों का समर्थन अत्यंत निर्णायक बन गया है।
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भाजपा को कम से कम पांच अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत
बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए भाजपा को कम से कम पांच अन्य पार्षदों के समर्थन की जरूरत है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस को अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए 10 अतिरिक्त पार्षदों का साथ जुटाना होगा। इसे देखते हुए दोनों ही दलों ने अपने पार्षदों को एकजुट रखने के साथ निर्दलीय पार्षदों से संपर्क तेज कर दिया है। लगातार बैठकों और रणनीतिक वार्ताओं के जरिये दोनों राजनीतिक दल अपने-अपने कुनबे को संभालने का प्रयास कर रहे हैं। अब 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग पर ही अगले महापौर का फैसला टिक गया है।