जानिए, क्या है आटा-साटा प्रथा?
राजस्थान में फैली इस प्रथा को साफ तौर पर समझें तो शादी के लिए लड़की के बदले लड़की देना ही आटा-साटा है। मान लीजिए कि रोहन की बहन की शादी मोहन से तय हो करनी है। ऐसे में रोहन के माता-पिता की शर्त होगी कि मोहन की बहन की शादी उसके माता पिता को रोहन से करनी पड़ेगी। यह कुप्रथा प्रदेश के ज्यादातर जिलों में फैली हुई है।
रिश्तेदारों तक की करा दी जाती है शादी
आटा-साटा प्रदेश में बाल विवाह का एक सबसे बड़ा कारण भी है। इसके जरिए तय हुए रिश्तों में उम्र को भी दरकिनार कर दिया जाता है। इस कुप्रथा के जरिए दो परिवारों में लड़की का लेने देन होता है, लेकिन कई मामलों में ऐसा भी देखा गया है कि लड़की के बदले उसके परिवार सहित रिश्तेदारों की शादियां भी करा दी जाती हैं। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि लड़की से दोगुने उम्र के व्यक्ति से उसका विवाह तय कर दिया जाता है।
बहू के लिए देर से करते हैं बेटी की शादी
आटा साटा के तहत होने वाली शादियों में ऐसा भी देखा गया है कि लड़के की शादी के लिए परिवार वाले बेटी की शादी देर से करते हैं। मान लीजिए कि एक परिवार में एक भाई और बहन हैं। बड़ी बहन और छोटे भाई के बीच 6-7 साल का अंतर है। ऐसे में परिवार वाले बेटी की शादी तब तक नहीं करेंगे, जब तक उनका बेटा भी शादी करने के लायक न हो जाए। इसके बाद आटा-साटा के जरिए दोनों की शादी कर दी जाती है। इस तरह के मामलों में यह भी देखा गया है कि बेटी की उम्र ज्यादा होने के कारण परिवार वाले उम्रदराज व्यक्ति से जबरन शादी करा देते हैं।
पत्नी का कराया गर्भपात, पति ने लगा ली फांसी
नागौर के सदर इलाके में रहने वाले रामनिवास (21) और उसकी बहन सुशीला (25) की शादी छह साल पहले आटा-साटा में हुई थी। रामनिवास की शादी गुड्डी (19) और सुशीला का विवाह गुड्डी के चाचा से हुआ था। उस समय रामनिवास और गुड्डी दोनों ही नाबालिग थे। इस कारण गुड्डी अपने मायके में ही थी। दोनों के बालिग होने पर रामनिवास के परिजनों ने गुड्डी को ससुराल भेजने के लिए कहा गया तो उसके मायके वाले टालामटोली करने लगे।
रामनिवार और गुड्डी लगातार एक दूसरे के संपर्क में थे। गुड्डी के घरवालों ने उसे ससुराल भेजने से मना किया तो दोनों ने पिछले साल सितंबर को शादी की और साथ रहने लगे। 31 मार्च को गुड्डी की मां भंवरी देवी कुछ लोगों के साथ उसके घर आई और भाइयों की शादी का बहाना बनाकर उसे अपने साथ ले गई। एक अप्रैल को गुड्डी के परिवार वाले उसे अस्पताल ले गए और उसका गर्भपात करा दिया। रामनिवास दो अप्रैल को थाने पहुंचा और पुलिस में शिकायत दी। आरोप है कि पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई नहीं की। बेटे को खोने और पत्नी की दूसरी शादी की बात से परेशान होकर रामनिवास ने चार अप्रैल को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
21 साल की सुमन ने कर ली थी आत्महत्या।
- फोटो : सोशल मीडिया
21 साल की सुमन ने कुएं में कूदकर दे दी थी जान
नागौर में दस महीने पहले एक विवाहिता की आत्महत्या ने पूरे समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया था। 21 साल की सुमन चौधरी की शादी आटा-साटा प्रथा के जरिए हुए थी। शादी के कुछ समय बाद उसका पति पैसे कमाने के लिए विदेश चला और सुमन अपने मायके वापस आ गई। आठ महीने मायके में रहने के बाद उसने कुंए में कूद कर अपनी जान दे दी। सुमन ने जो सुसाइड नोट लिखा उसने सभी को झकझोर कर रख दिया। पढ़िए सुमन का सुसाइट नोट....
लड़कियों के लिए जिंदा मौत है आटा साटा...
मेरा नाम सुमन चौधरी है। मुझे पता है सुसाइड करना गलत है, पर सुसाइड करना चाहती हूं। मेरे मरने की वजह मेरा परिवार नहीं, पूरा समाज है। जिसने आटा-साटा नाम की कुप्रथा चला रखी है। इसके कारण लड़कियों को जिंदा मौत मिलती है। इसमें लड़कियों को समाज के समझदार परिवार अपने लड़कों के बदले बेचते हैं।
आप समाज के लोगों की नजरों में तलाक लेना गलत है, परिवार के खिलाफ शादी करना गलत है, तो फिर यह आटा-साटा भी गलत है। आज इस प्रथा के कारण हजारों लड़कियों की जिंदगी और परिवार पूरे बर्बाद हो गए हैं। इस प्रथा के कारण पढ़ी-लिखी लड़कियों की जिंदगी खराब हो जाती है। इसी प्रथा के कारण 17 साल की लड़की की शादी 70 साल के बुजुर्ग से कर दी जाती है। केवल अपने स्वार्थ के कारण।
मैं चाहती हूं, मेरी मौत के बाद यह मेरी बातें बनाने की जगह, मेरे परिवार वालों पर उंगली उठाने की जगह, इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाएं। इस प्रथा को बंद करने के लिए शुरुआत भाइयों को करनी होगी। मेरी हर एक भाइयों को अपनी बहन व राखी की सौगंध, अपनी बहन की जिंदगी खराब करके अपना घर न बसाए। आज इस प्रथा के कारण समाज की सोच कितनी खराब हो गई है कि लड़की के पैदा होते ही तय कर लेते हैं कि इसके बदले किसकी शादी करानी है।
मैं चाहती हूं, कि इस कुप्रथा की जानकारी स्कूल और कॉलेजों की पुस्तकों में दी जाए, ताकि हजारों लड़कियों की जिंदगी बर्बाद होने से बच जाए। आप समाज के लोगों से मेरी विनती है कि इस प्रथा को बंद कर दें। सुमन ने अपने सुसाइट नोट में यह भी लिखा था कि, मेरी चिता को अग्नि मेरा छोटा भाई दे और कोई नहीं, मेरा पति भी नहीं।
फेरों से पहले टूटी बहन की शादी तो भाई की भी नहीं हो सकी
शेखावाटी में पिछले साल जुलाई महीने में एक परिवार को आटा-साटा प्रथा के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा था। दरअसल, दादिया थाना इलाके में तारपुरा गांव में सुभिता की शादी बुगाला के अजय जांगिड़ से 3 जुलाई को होनी थी। सुभिता के भाई पंकज की शादी झुंझुनूं के बजावा निवासी कंचन से 5 जुलाई को होनी थी। तीन जुलाई को बारात झुंझुनूं के बुगाला से आई थी, लेकिन फेरों से पहले लड़के पक्ष ने सवा लाख रुपये की मांग कर दी। यह रुपये नहीं देने पर बारात बिना शादी किए लौट गई। दुल्हन मंडप में बैठकर दूल्हे का इंतजार करती रही, लेकिन दूल्हा नहीं आया। इससे दुल्हन के भाई की शादी भी टूट गई।