राजस्थान के अजमेर में शनिवार को हुई मुस्लिम महिलाओं की एक बैठक में हिजाब को लेकर हो रहे विवाद पर आपत्ति जताई गई। महिलाओं ने इस पूरे मामले को हिंदुओं और मुस्लिों को बांटने की साजिश बताया और हिजाब के पक्ष में आवाज उठाई।
अजमेर के दरगाह क्षेत्र में मुस्लिम समाज की महिलाओं ने हिजाब को लेकर शनिवार को एक बैठक आयोजित की। यहां महिलाओं ने हिजाब विवाद को लेकर अपनी बात रखी और कहा कि अगर इस पर जल्द ही अदालत की ओर से फैसला नहीं आया तो अजमेर की मुस्लिम महिलाएं आंदोलन की शुरुआत करेंगी। बैठक में शामिल रहीं सैयदा तस्कीन चिश्ती ने कहा कि हिंदुस्तान के हुक्मरानों को बार-बार शरीयत में दखन नहीं देना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि पहले आप तीन तलाक का बिल लेकर आए फिर आपको मस्जिदों में अजान से परेशानी होने लगी। अब हिजाब को मुद्दा बनाकर मुस्लिम महिलाओं की भावनाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश की जा रही है। हिजाब पहनना हमारा धार्मिक और संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, इस मामले में अब अदालत की ओर से फैसला सुनाए जाने का इंतजार है। अगर अदालत ने जल्द ही फैसला नहीं सुनाया तो हम आंदोलन करेंगे।
'किसी के दबाव में आकर हिजाब नहीं पहनती हैं मुस्लिम महिलाएं'
वहीं, सैयदा आसमा चिश्ती ने कहा कि कर्नाटक में मुस्कान नामक युवकी के साथ हुई घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है। हिजाब की परंपरा पुराने जमाने से चली आ रही है। मुस्लिम महिलाएं इसे अपनी मर्जी से बिना किसी के दबाव में पहनती हैं। कुछ लोग समाज में केवल नफरत फैलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा, देश में हिंदुओं और मुस्लिमों को धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की जा रही है, जिसे कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
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बैठक में मौजूद रहीं सैयदा तबस्सुम चिश्ती ने कहा कि स्कूल-कॉलेज को लेकर मुस्लिम महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है। आज उन्हें स्कूल-कॉलेजों में रोका जा रहा है, कल बाजार में रोका जाएगा। सैयदा आफताब ताज ने कहा कि राजस्थानी महिलाएं घूंघट करती हैं, जैन धर्म की महिलाएं पूरा शरीर ढकती हैं। कई धर्मों में महिलाएं धर्म के हिसाब से कपड़े पहनती हैं तो फिर केवल मुस्लिम महिलाओं को ही हिजाब से क्यों रोका जा रहा है।