भारत रत्न प्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर का रविवार सुबह 92 साल की उम्र में निधन हो गया। लता मंगेशकर के निधन पर पंजाब के गायकों में भी दुख की लहर है। सूफी गायक पूरनचंद वडाली ने कहा कि मैं बहुत दुखी और हतप्रभ हूं कि लता मंगेशकर जी नहीं रहीं। उनके गीतों ने शांति दी। उनके गाने और आवाज को कोई नहीं भूल सकता। वह हमेशा जीवित रहेंगी। वहीं गायक लखविंदर वडाली ने कहा कि लता जी का यूं चले जाना असहनीय है। वैसे तो एक न एक दिन सभी ने ये जहान छोड़ जाना है, मगर कुछ हस्तियां ऐसी होती हैं जिनके जाने का गम कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्हीं में से एक थी लता मंगेशकर जी। वे साक्षात सरस्वती की देवी थीं।
वडाली ने कहा कि पिछले दिनों जब वे कपिल शर्मा के शो के शूट के लिए मुंबई गए थे तब उन्होंने लता जी से मिलने का प्रोग्राम भी बनाया था। मगर उनकी किस्मत में शायद लता जी के साथ मिलना नहीं लिखा था क्योंकि उस समय वे तबियत खराब होने के कारण अस्पताल में एडमिट थी। उनके पिता व चाचा जी वडाली ब्रदर्स पूरन चंद व प्यारे लाल वडाली जी को लता जी का सानिध्य मिला था। वे दोनों एक बार लता जी को मिल चुके हैं। मगर मेरी बदकिस्मती कि मेरा उनसे मिलने का सपना पूरा न हो सका। लता जी का जाना फिल्म इंडस्ट्री के लिए कभी न पूरा होने वाला घाटा है। लोग उन्हें उनके गाए गीतों के जरिए हमेशा याद करते रहेंगे।
आज मन उदास हो गया: खुदाबख्श
गायक खुदाबख्श ने भी लता जी के निधन पर अफसोस जाहिर करते हुए कहा कि स्वर कोकिला के निधन की खबर सुन मन आज उदास हो गया है। वे जीवन में एक बार लता जी से मिलना चाहते थे, मगर उनकी इच्छा अधूरी रह गई। वसंत पंचमी के दिन जहां मां सरस्वती का पूजन हुआ, वहीं एक दिन बाद ही लता जी का यूं हम सबको छोड़ जाना मां सरस्वती को विदाई देने जैसा लग रहा है। लता जी की कमी तो फिल्म उद्योग को खलेगी, मगर लोग उन्हें कभी न भुला सकेंगे क्योंकि उनके द्वारा गाए गीत उन्हें आजीवन अमर बनाते हैं।