बलिदान देकर यूनिट के गौरव को बढ़ाया
जिला पठानकोट के सीमावर्ती गांव झड़ौली के लांसनायक हरीश पाल शर्मा का जन्म 12 मई 1969 को पिता बिशन दास व माता राजदुलारी के घर हुआ। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बमियाल से मैट्रिक करने के बाद 1990 को सेना की 13 जैक राइफल यूनिट में भर्ती हो गए। 15 जून 1999 को कारगिल की दुर्गम चोटियों पर पाक सेना से लड़ते हुए अपना बलिदान देकर यूनिट के गौरव को बढ़ा गए।
वीरता से लड़ते हुए दुश्मन के दांत किए थे खट्टे
गांव भटोआ के सिपाही मेजर सिंह का जन्म 27 जुलाई 1974 को पिता बलकार सिंह व माता रखवंत कौर के घर हुआ। सरकारी हाई स्कूल साहोवाल से दसवीं कक्षा पास करने के बाद 1995 को यह सेना की 8 सिख यूनिट में भर्ती हो गए। यह 21 मई 1999 को टाइगर हिल को फतेह करने वाली टीम का हिस्सा थे। दोनों ओर से हुई भीषण गोलाबारी में पाक सेना का मुंहतोड़ जवाब देते हुए सिपाही मेजर सिंह ने दुश्मन के दांत खट्टे कर अपना बलिदान दे दिया।
19 वर्षीय की अल्पायु में सतवंत ने पिया था शहादत का जाम
कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले सैनिकों में सतवंत सिंह सबसे कम आयु के थे। उनका जन्म 2 दिसंबर 1980 को गांव सलाहपुर बेट में माता सुखदेव कौर व पिता कश्मीर के घर हुआ। 1 जनवरी 1998 को यह सेना की आठ सिख यूनिट में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए। चार जुलाई 1999 को सतवंत सिंह ने अपनी सैन्य टुकड़ी के आगे होकर दुश्मन से लोहा लिया तथा छोटी आयु में ही बड़ा काम करते हुए दुश्मन को परास्त कर अपना बलिदान दे दिया।
दुश्मन पर मौत बनकर टूटे लांस नायक कंसराज
गांव डेरा पठाना के लांसनायक कंसराज का जन्म 14 अगस्त 1965 को पिता बिहारी लाल व माता सेवा बंती के घर हुआ। सरकारी स्कूल धारोवाली से दसवीं करने के बाद 7 अगस्त 1985 को सेना की 7 डोगरा रेजीमेंट में भर्ती हुए। 31 अगस्त 1999 को कारगिल की चोटियों पर छुपे पाक सेना के जवानों ने इनकी सैन्य टुकड़ी पर गोलीबारी की। लांसनायक कंसराज ने उन्हें पीछे हटने पर विवश कर दिया तथा खुद दुश्मन द्वारा दागी एक गोली से शहादत का जाम पी गए।