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जरा याद करो कुर्बानी: गुरदासपुर के सात सपूतों ने कारगिल युद्ध में दी थी अपनी आहूति... जानें कौन थे जांबाज

Tue, 26 Jul 2022 10:25 AM IST
निवेदिता वर्मा मनन सैनी, संवाद न्यूज एजेंसी, गुरदासपुर (पंजाब)

सार

शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि कारगिल के इन जांबाजों को देश का सलाम है। जिन्होंने देश के आने वाले कल के लिए अपना आज कुर्बान कर देश की भावी पीढ़ी में देशभक्ति की अलख जगा उनमें राष्ट्र पर मर मिटने का जज्बा भर दिया।  
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कारगिल के शहीद। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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कारगिल युद्ध की याद आते ही भारतीय सेना के शौर्य के समक्ष समूह देशवासियों का सिर श्रद्धा से झुक जाता है। कारगिल युद्ध में पूरे देश के 528 सैनिकों ने शहादत पाई वहीं शहीदों की जन्मभूमि पंजाब के जिला गुरदासपुर के सात और पठानकोट के एक वीर सैनिक ने कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों पर अद्भुत वीरता व शौर्य का प्रदर्शन कर अपने प्राणों की आहुति दी थी। 
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टाइगर हिल पर तिरंगा फहरा सूबेदार निर्मल सिंह ने पीया था शहादत का जाम

सूबेदार निर्मल सिंह का जन्म 6 मई 1957 को गांव छीना बेट में पिता धना सिंह व माता शांति देवी के घर हुआ। सरकारी हाई स्कूल तालिबपुर पंडोरी से मैट्रिक करने के बाद 21 सितंबर 1976 को सेना की 8 सिख रेजीमेंट में भर्ती हो गए। कारगिल युद्ध के दौरान सबसे पहले इनकी यूनिट को वहां भेजा गया। 6 जुलाई 1999 को इन्हें टाइगर हिल फतेह करने का आदेश मिला। सूबेदार निर्मल सिंह के नेतृत्व में एक सैन्य दल ने कठिन चढ़ाई चढ़ते हुए पाक सेना पर धावा बोला। सूबेदार निर्मल सिंह ने अपने साथी सैनिकों के प्राणों को बचाते हुए पाक सेना के कई सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। इसी बीच दुश्मन की एक गोली इनके सीने को भेदती हुई निकल गई। उनकी बहादुरी के लिए इन्हें मरणोपरांत वीरचक्र से सम्मानित किया गया था।

वीरता से लड़े सूबेदार अजीत सिंह 

हरबंस सिंह और यशपाल कौर निवासी दकोहा के बहादुर बेटे सूबेदार अजीत सिंह सरकारी हाई स्कूल घुमाण से दसवीं करने के बाद 1976 में सेना की आरटी 305 यूनिट में भर्ती हुए। 20 अगस्त 1999 को कारगिल की चोटियों को फतेह कर बहादुरी का परचम फहराया। पाक सेना से लड़ते हुए अपना बलिदान दे दिया। 

घायल अवस्था में भी दुश्मन से लड़ते रहे लांसनायक रणबीर सिंह

रणबीर सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1966 को गांव आलमा में पिता ठाकुर संसार सिंह व माता कौशल्या देवी के घर हुआ। सरकारी हाई स्कूल भैणी मियां खां से दसवीं पास करने के बाद 30 अक्तूबर 1997 को सेना की 13 जैक राइफल यूनिट में भर्ती हो गए। 16 जून 1999 को इनकी सैन्य टुकड़ी ने 16 हजार फीट की ऊंची कारगिल की मास्को घाटी पर कठिन चढ़ाई चढ़ते हुए पाक सेना पर हमला बोला। लांसनायक रणबीर सिंह व इनकी सैन्य टुकड़ी में वीरता की मिसाल कायम करते हुए दुश्मन के 25 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। गंभीर रुप से घायल होने के बावजूद रणबीर दुश्मन से लोहा लेते रहे और अंत में भारत माता का यह लाल देश पर फिदा हो गया।

कारगिल की बर्फीली चोटियों पर मुकेश ने दिखाई वीरता

धारीवाल के नजदीकी गांव फत्तेनंगल के लांसनायक मुकेश कुमार का जन्म 15 फरवरी 1974 को पिता महंगा राम व माता सुभाष रानी के घर हुआ। मिशन हाई स्कूल धारीवाल से दसवीं करने के बाद 14 अगस्त 1991 को यह सेना की 1889 आरटी रेजीमेंट में भर्ती हो गए। 26 जून 1999 को कारगिल की बर्फीली चोटियों से पाक सेना को खदेड़ते हुए इन्होंने सीने पर गोली खाकर अपना बलिदान दे दिया।

बलिदान देकर यूनिट के गौरव को बढ़ाया 

जिला पठानकोट के सीमावर्ती गांव झड़ौली के लांसनायक हरीश पाल शर्मा का जन्म 12 मई 1969 को पिता बिशन दास व माता राजदुलारी के घर हुआ। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल बमियाल से मैट्रिक करने के बाद 1990 को सेना की 13 जैक राइफल यूनिट में भर्ती हो गए। 15 जून 1999 को कारगिल की दुर्गम चोटियों पर पाक सेना से लड़ते हुए अपना बलिदान देकर यूनिट के गौरव को बढ़ा गए। 

वीरता से लड़ते हुए दुश्मन के दांत किए थे खट्टे 

गांव भटोआ के सिपाही मेजर सिंह का जन्म 27 जुलाई 1974 को पिता बलकार सिंह व माता रखवंत कौर के घर हुआ। सरकारी हाई स्कूल साहोवाल से दसवीं कक्षा पास करने के बाद 1995 को यह सेना की 8 सिख यूनिट में भर्ती हो गए। यह 21 मई 1999 को टाइगर हिल को फतेह करने वाली टीम का हिस्सा थे। दोनों ओर से हुई भीषण गोलाबारी में पाक सेना का मुंहतोड़ जवाब देते हुए सिपाही मेजर सिंह ने दुश्मन के दांत खट्टे कर अपना बलिदान दे दिया।
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19 वर्षीय की अल्पायु में सतवंत ने पिया था शहादत का जाम

कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले सैनिकों में सतवंत सिंह सबसे कम आयु के थे। उनका जन्म 2 दिसंबर 1980 को गांव सलाहपुर बेट में माता सुखदेव कौर व पिता कश्मीर के घर हुआ। 1 जनवरी 1998 को यह सेना की आठ सिख यूनिट में भर्ती होकर देश सेवा में जुट गए। चार जुलाई 1999 को सतवंत सिंह ने अपनी सैन्य टुकड़ी के आगे होकर दुश्मन से लोहा लिया तथा छोटी आयु में ही बड़ा काम करते हुए दुश्मन को परास्त कर अपना बलिदान दे दिया।

दुश्मन पर मौत बनकर टूटे लांस नायक कंसराज

गांव डेरा पठाना के लांसनायक कंसराज का जन्म 14 अगस्त 1965 को पिता बिहारी लाल व माता सेवा बंती के घर हुआ। सरकारी स्कूल धारोवाली से दसवीं करने के बाद 7 अगस्त 1985 को सेना की 7 डोगरा रेजीमेंट में भर्ती हुए। 31 अगस्त 1999 को कारगिल की चोटियों पर छुपे पाक सेना के जवानों ने इनकी सैन्य टुकड़ी पर गोलीबारी की। लांसनायक कंसराज ने उन्हें पीछे हटने पर विवश कर दिया तथा खुद दुश्मन द्वारा दागी एक गोली से शहादत का जाम पी गए। 

 

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