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स्वतंत्रता दिवस: जयमल सिंह ने देश की खातिर बिगुल बजाया तो ब्रिटिश सेना को रास नहीं आया

Mon, 15 Aug 2022 07:01 AM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

जैमल सिंह को अन्य ब्रिटिश सैनिकों के साथ जापान में बंदी बना लिया गया। कुछ माह बाद कैद से छूटने पर पता चला कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना की है तो वह देश की आजादी के लिए उक्त फौज में शामिल हो गए।
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101 वर्षीय जयमल सिंह। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अमृतसर के स्वतंत्रता सेनानी जयमल सिंह आज जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। 1921 में पाकिस्तान के सियालकोट में जन्मे जयमल सिंह ने दूसरे विश्व युद्ध में ब्रिटिश आर्मी में शामिल होकर जापान के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जब वह देश की आजादी के लिए सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी का हिस्सा बने तो ब्रिटिश आर्मी ने उन्हें घर का रास्ता दिखा दिया। 

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अमृतसर के न्यू गुरबक्श नगर निवासी जयमल सिंह उन स्वतंत्रता सेनानियों में से शुमार हैं, जिन्होंने वर्षो तक परिवार से दूर रहकर देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। जयमल सिंह का विवाह 15 साल की उम्र 1936 को स्वर्ण कौर के साथ हुआ। 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो वे ब्रिटिश आर्मी में भर्ती हो गए। सियालकोट के नौशहरा डीपू में उन्हें सात माह की ट्रेनिंग देकर अंग्रेज सरकार ने द्वितीय विश्व युद्ध में लड़ने जापान भेज दिया।

परिवार को लगा मर चुके हैं जयमल
जैमल सिंह को अन्य ब्रिटिश सैनिकों के साथ जापान में बंदी बना लिया गया। कुछ माह बाद कैद से छूटने पर पता चला कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने इंडियन नेशनल आर्मी की स्थापना की है तो वह देश की आजादी के लिए उक्त फौज में शामिल हो गए। सेनानी जयमल सिंह का कहना है कि करीब पांच साल तक वे अलग-अलग जगहों पर लड़ते रहे। इस दौरान उन्हें कई बार कैद भी किया गया। उनके परिवार में सभी यही समझते थे कि जयमल सिंह विश्व युद्ध में मारे जा चुके हैं। इसके बाद परिवार में उनकी पत्नी स्वर्ण कौर की दूसरी शादी करने की बातें चल रही थीं कि 1944 में वे वापस लौट आए और परिवार को अपनी गतिविधियों के बारे में बताया। 
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बिट्रिश फौज ने वर्दी में ही घर भेज दिया
ब्रिटिश सरकार ने उनसे बगावत करने का कारण पूछा तो उनका कहना था कि वे अंग्रेज सरकार के लिए लड़ सकते हैं तो क्या अपने देश की अजादी के लिए नहीं लड़ सकते। इस पर ब्रिटिश आर्मी के अधिकारियों ने कुछ माह बाद उन्हें ब्रिटिश सेवा का बिना कुछ लाभ दिए वर्दी में ही घर भेज दिया। 

इसके बाद वे लगातार देश की आजादी के लिए संघर्ष करते रहे। उन्होंने इंपीरियल बैंक में गार्ड की नौकरी की। भारत सरकार जयमल सिंह की देश के प्रति सेवाओं को देखते हुए उन्हें स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया। उन्हें सरकार की ओर से पेंशन दी जा रही है। इसके अलावा कोई और सुविधा उन्हें नहीं मिली। जयमल सिंह अब 101 वर्ष के हो चुके हैं। 

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