नकल का केस दर्ज कर सरकार ने परीक्षा रद्इ कर दी थी। हर महीने मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री को पत्र लिख जा रहे हैं। दिसंबर 2020 में नोटिफिकेशन जारी किया। इन पदों के लिए 78000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया। पीपीएससी ने इस पद के लिए आवेदन शुल्क 3000 रुपये प्रति उम्मीदवार रखा।
पंजाब सरकार ने नायब तहसीलदारों के 78 पद भरने के लिए दिसंबर 2020 में नोटिफिकेशन जारी किया। इन पदों के लिए 78000 उम्मीदवारों ने आवेदन किया। पीपीएससी ने इस पद के लिए आवेदन शुल्क 3000 रुपये प्रति उम्मीदवार रखा, जिससे सरकार के खाते में 23.40 करोड़ रुपये आ गए। इसी दौरान परीक्षा में नकल करने और बाहरी लोगों द्वारा परीक्षा में बैठने के आरोप सामने आने के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द दी। इसके चलते चुने गए किसी भी उम्मीदवार को नौकरी नहीं मिल सकी।
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नायब तहसीलदार के पद के लिए आवेदन करने वालों में से 45000 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी और उनमें से 1700 उम्मीदवार ही पास हुए। मई 2022 में हुई परीक्षा का परिणाम अक्तूबर 2022 में आ गया था। चयन की बाकी प्रक्रिया पूरी करने के बाद 78 उम्मीदवारों को नौकरी के लिए चुन लिया गया। इनमें से 60 उम्मीदवारों ने सरकार से परीक्षा रद्द न करने और चुने गए उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग की है।
शनिवार को चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में उपस्थित, चुने गए उम्मीदवारों में ह्रदयवीर सिंह, हरप्रीत सिंह, कशिश गर्ग, जसप्रीत कौर, पुखराज सिंह और जश्न कुमार ने कहा कि जांच में सभी दोषियों का पता चल चुका है और उनके खिलाफ अदालत में चार्जशीट भी जारी हो चुकी है।
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कुछ गलत लोगों के कारण ऐसे सभी उम्मीदवार जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी और चयन प्रक्रिया की सभी शर्तें पूरी की हैं, उन्हें नियुक्ति दी जानी चाहिए। उम्मीदवारों ने कहा कि पूरी परीक्षा रद्द करने से चुने गए उम्मीदवारों को बहुत नुकसान होगा, क्योंकि उन्हें बिना किसी अपराध के सजा मिलेगी।
उन्होंने बताया कि अक्तूबर में नौकरी के लिए चुने जाने के बाद से वह मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री, पीपीएससी के चेयरमैन, एफसीआर को लगातार पत्र भेजकर नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनके पत्रों का सरकार ने जवाब नहीं दिया।