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Punjab: बजट से खुश नहीं किसान, कृषि क्षेत्र को नजरअंदाज करने का आरोप, प्रदेशभर में प्रदर्शन

Thu, 02 Feb 2023 12:32 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, पंजाब

सार

बजट में खेती और किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए किसान मजदूर संघर्ष कमेटी गुरुवार को सभी जिलों में धरना प्रदर्शन कर रही है। किसानों संगठनों में केंद्र सरकार के प्रति रोष है। 
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विरोध प्रदर्शन करते किसान। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बुधवार को पेश किए बजट से पंजाब में किसान संगठन नाराज नजर आ रहे हैं। पंजाब के किसानों ने केंद्रीय बजट में कृषि को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। पंजाब के सभी जिलों में उपायुक्त कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन का एलान किया गया है। 

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पंजाब के अमृतसर में किसान मजदूर संघर्ष ने वित्त मंत्री का पुतला फूंका है। किसानों से जुड़े संगठनों ने बजट को कृषि के लिए निराशाजनक बताया है। अमृतसर में किसान मजदूर संघर्ष  कमेटी की ओर से पंजाब व कृषि सेक्टर को नजरअंदाज करने के खिलाफ मोदी सारकर ओर केंद्रीय वित्त मंत्री का पुतला फूंक कर रोष प्रदर्शन किया गया है।

संगठन के नेता सरवन सिंह प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे हैं। बजट में खेती और किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए किसान मजदूर संघर्ष कमेटी गुरुवार को सभी जिलों में धरना प्रदर्शन कर रही है। 
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किसानों की आय नहीं कर्ज दोगुना करेगा बजट : हरदेव 
केंद्रीय बजट को किसान व जन विरोधी करार देते कुल हिंद किसान सभा ने रोष प्रदर्शन किया। गांव बख्शीवाला में इकट्ठे हुए किसानों ने सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। इस समय उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सभा के प्रदेश प्रतिनिधि कामरेड हरदेव सिंह बख्शीवाला ने कहा कि इस बजट में किसानों, मजदूरों और गरीब वर्ग के लिए कुछ नहीं है।

उन्होंने कहा कि पिछले साल के बजट में कृषि योजनाओं के लिए 3.84 प्रतिशत राशि रखी गई थी, जिसे इस बजट में घटाकर 3.20 प्रतिशत कर दिया गया है। फसल बीमा के लिए 15500 करोड़ से घटाकर 13625 करोड़ कर दिया गया है ।

निधि योजना, इस वर्ष के बजट में 8000 करोड़ की कटौती की गई है। उन्होंने कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी नहीं हुई है, लेकिन नए बजट में उन्होंने कृषि ऋण को दोगुना करने की व्यवस्था जरूर कर दी है। इस मौके पर बहादुर सिंह, जीत सिंह, मलकीत सिंह हरविंदर सिंह, धन्ना सिंह, दर्शन सिंह, माखन सिंह आदि मौजूद रहे।


किसान नेताओं ने की बजट की आलोचना, कहा- किसानों और मजदूरों को किया निराश
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से बुधवार को पेश किए बजट ने किसानों व मजदूरों को निराश किया है। दिल्ली किसान मोर्चे में अहम भूमिका निभाने वाले भारतीय किसान यूनियन एकता (डकौंदा) के महासचिव जगमोहन सिंह ने बजट की आलोचना की है। उनका कहना है कि मोदी सरकार का यह 10वां बजट है, लेकिन इस बार भी पंजाब में खेतीबाड़ी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कोई विशेष पैकेज नहीं दिया। केवल बार-बार मोटे अनाज की पैदावार बढ़ाने पर जोर दिया है।

किसान खुद भी धान व गेहूं की परंपरागत खेती चक्कर से बाहर निकलना चाहते हैं, लेकिन सरकार की ओर से इसके लिए कोई ठोस योजनाबंदी बजट में पेश नहीं की गई। किसान नेता ने कहा कि केंद्र सरकार को चाहिए कि सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद की गारंटी दे।

 

किसान नेता जगमोहन सिंह का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा की अगुवाई में संघर्ष को लगातार जारी रखते हुए सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद के लिए कानून बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। बजट सत्र के दौरान संयुक्त किसान मोर्चे की ओर से दिल्ली में बड़ा इकट्ठ करने का एलान किया गया है। इस संबंधी कुरुक्षेत्र में 9 फरवरी को बैठक होगी।

किसानों व मजदूरों पर चढ़े कर्ज संबंधी कोई एलान नहीं : किसान नेता रणजीत सिंह
भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के जिला प्रधान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार जब से सत्ता में आई है, तब से दावे कर रही है कि साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी कर दी जाएगी। लेकिन हुआ ऐसा कुछ नहीं है। ऊपर से बढ़े खेती खर्चों के कारण किसान लगातार घाटे में जा रहे हैं और आत्महत्याएं करने के लिए मजबूर हैं। बजट में किसानों व मजदूरों पर चढ़े कर्जों संबंधी सरकार ने कुछ एलान नहीं किया है। हालांकि कर्जा देने की सीमा बढ़ाई है, लेकिन ब्याज में कोई छूट नहीं दी।


सहकारिता विभाग को अलग तौर पर विकसित करने का एलान औपचारिकता : अवतार सिंह
क्रांतिकारी किसान यूनियन पंजाब के किसान नेता अवतार सिंह कौरजीवाला का कहना है कि केंद्र की ओर से सहकारिता विभाग को अलग तौर पर विकसित करने का एलान सराहनीय है। परंतु इस संबंधी अलग पैकेज की जरूरत है। आखिरी बजट में यह एनान महज औपचारिकता लग रहा है। देश के 84 फीसदी किसान छोटे किसान हैं। एक तरफ सरकार सहकारिता क्षेत्र को और विकसित करने की बात करती है, दूसरी तरफ डिजिटल किसानी की बात करती है, जो खेती को काॅरपोरेट के साथ जोड़ना है।

वहीं, भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के पूर्व जिला प्रधान मनजीत सिंह न्याल ने कहा कि सरकार कह रही है कि गांवों में सहकारिता सोसाइटियों के जरिए कुदरती खेती को विकसित किया जाएगा, जो अच्छी पहल है। लेकिन सरकार को चाहिए कि छोटे किसानों को सीधी मदद दें, जो अभी भी बिना खादों व कीटनाशकों के खेती करते हैं।

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