इंटरनेट पर युवतियों के अश्लील मैसेज और चित्र पोस्ट करने को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने रेप के बराबर माना है।
यह टिप्पणी कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में अभियुक्त की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करने के दौरान दी। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं और सामाजिक संरचना को खराब कर रहे हैं। लिहाजा ऐसे मामलों पर अंकुश लगाना जरूरी है।
यह टिप्पणी जस्टिस महेंद्र सिंह सुल्लर ने आरोपी आदर्श सिंह की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। आदर्श सिंह और उसके एक साथी को अमृतसर पुलिस ने पिछले वर्ष 24 अप्रैल को ऐसे ही मामले में गिरफ्तार किया था। उस पर रेप के साथ आईटी एक्ट की धारा लगाई थी।
इस दौरान अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि इस मामले में शिकायतकर्ता युवती की शादी से पहले याचिकाकर्ता ने उसे और उसके रिश्तेदारों को कई अश्लील मैसेज भेजे।
यह मैसेज उत्पीड़न की नियत से भेजे गए थे। शिकायतकर्ता को आपत्तिजनक चित्रों को इंटरनेट पर डालकर ब्लैकमेल किया गया। सबूत के तौर पर शिकायतकर्ता ने अपना मोबाइल भी अदालत के सामने साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया, जिसमें वह अश्लील मैसेज मौजूद थे।