पटियाला। पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले की भारी कमी का असर अब बिजली सप्लाई पर पड़ने लगा है। अभी तक किसानों को ही धान की फसलों के लिए दिन में आठ घंटे की बजाय मुश्किल से चार से पांच घंटे बिजली मिल पा रही थी। इसी बीच शनिवार को गांवों के साथ-साथ शहरों के घरेलू उपभोक्ताओं को भी बिजली की कमी के चलते कटों का सामना करना पड़ा।
उधर बिजली के इस गंभीर संकट के बीच पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पावरकॉम) ने शनिवार को कोयले की कमी का हवाला देते हुए उपभोक्ताओं को बिजली की बचत करने की अपील की है।
आंकड़ों के मुताबिक रोपड़ थर्मल प्लांट में इस समय चार दिन का, लहरा मुहब्बत में भी चार, वहीं तलवंडी साबो में मात्र एक, राजपुरा में भी एक और गोइंदवाल में आधे दिन से भी कम का कोयला बचा है।
नियमों के मुताबिक थर्मल प्लांट में 25 से 30 दिन का कोयला होना जरूरी है। कोयले की इस भारी कमी के मद्देनजर पावरकॉम ने रोपड़ के चार यूनिटों में दो और लहरा मुहब्बत के एक यूनिट को बंद कर दिया है। वहीं शनिवार को तलवंडी साबो का भी एक यूनिट बंद कर दिया गया।
अब तलवंडी साबो प्लांट के दो यूनिट चलाए जा रहे हैं, लेकिन वह भी आधी क्षमता पर। इसी तरह से गोइंदवाल साहिब के दोनों यूनिटों को आधी क्षमता पर कर दिया गया है। पावरकॉम को शुुक्रवार के 3488 मेगावाट के मुकाबले शनिवार को प्राइवेट थर्मल प्लांटों से 2297 मेगावाट बिजली ही मिली, जबकि सरकारी थर्मलों से मात्र 934 मेगावाट और हाइडलों से 228 मेगावाट बिजली मिली। शनिवार को बिजली की मांग 8000 मेगावाट के करीब रही।
बिजली की पैदावार कम होने कारण पावरकॉम को बाहर से 3000 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ी। खास बात यह है कि पावरकॉम बाहर से 6800 मेगावाट तक बिजली खरीद सकता है। लेकिन इन दिनों पूरे देश में ही कोयले के संकट के चलते बिजली पैदावार कम हो रही है। इसलिए बाहर से कम बिजली मिल पा रही है।
मांग के मुकाबले बिजली की उपलब्धता कम होने कारण पावरकॉम को कट लगाने पड़े। शहरों में जहां दो से तीन घंटे तक के कट लगे, वहीं गांवों में तीन से चार घंटे के कटों का सामना करना पड़ा।
उधर, इस गंभीर संकट को देखते हुए पावरकाम ने उपभोक्ताओं से बिजली की बचत के लिए एसी बंद करने और लाइटों व अन्य बिजली उपकरणों का संयम से इस्तेमाल करने की अपील की है। माहिरों के मुताबिक अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में बिजली के लंबे कट के लिए लोग तैयार रहें।