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पंजाबी यूनिवर्सिटी में फर्जी बिलों के नाम पर 11 करोड़ से अधिक के घपले का पर्दाफाश घपले में 107 आरोपी शामिल

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पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी में फर्जी बिलों के नाम पर 11 करोड़ के बड़े घपले का पर्दाफाश हुआ है। इस घपले में 107 आरोपी पाए गए हैं और इनमें से 40 की यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पहचान भी कर ली है। पहचान किए आरोपियों में से 16 यूनिवर्सिटी के ही मुलाजिम हैं और बाकी 24 यूनिवर्सिटी के बाहर के हैं। वीसी प्रोफेसर अरविंद ने पुष्टि करते हुए बताया कि यूनिवर्सिटी ने मामले में कार्रवाई करते हुए 10 कर्मचारियों को मुअत्तल कर दिया है और छह एडहॉक मुलाजिमों को बर्खास्त कर दिया गया है।
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वीसी ने कहा कि जांच अभी भी जारी है और आगे जिस भी व्यक्ति के खिलाफ कोई सबूत मिलता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मई 2021 में यूनिवर्सिटी की ऑडिट व लेखा शाखा की ओर से कुछ शोधकर्ताओं के हाजिरी व महीनावार खर्चों के बिल संदिग्ध पाए गए थे। प्रारंभिक जांच के दौरान यह सामने आया था कि जिनके नाम के यह बिल थे, उस नाम का कोई भी शोधकर्ता किसी विभाग में नहीं था। इससे साफ हो गया था कि यह फर्जी बिल हैं। इस मामले को गंभीरता के साथ लेते हुए वीसी प्रोफेसर अरविंद ने तीन मेंबरी कमेटी गठित करके जांच करने के आदेश दिए थे।
इस कमेटी ने विभिन्न पहलुओं से पड़ताल करते हस्तलिखित माहिरों से फर्जी बिलों पर किए हस्ताक्षरों को मिलाकर देखने की प्रक्रिया को अपनी जांच का हिस्सा बनाया। इस प्रक्रिया के दौरान विभाग के दो कर्मचारी सीनियर सहायक निशु चौधरी व सेवादार जतिंदर की हस्तलिखित इन फर्जी बिलों की हस्तलिखित के साथ मेल खा गई, जिससे ये दोनों पकड़े गए। इसके बाद यूनिवर्सिटी ने फौरी कार्रवाई करते हुए निशु चौधरी और निगरान रमिंदर कौर को मुअत्तल कर दिया, जबकि सेवादार जतिंदर सिंह (दिहाड़ीदार) की सेवाओं को खत्म कर दिया। इनके खिलाफ संबंधित थाना अर्बन इस्टेट में भी केस दर्ज कराया गया और केस में चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया, जो अब न्यायिक हिरासत में हैं।
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उधर, यूनिवर्सिटी की ओर से इस केस में अभी भी जांच जारी रखी हुई है, जिसके नतीजे में अब यह तथ्य सामने आए हैं कि 107 अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर जाली बिल तैयार करके यूनिवर्सिटी के खाते से गलत ढंग से पैसे निकलवाए गए हैं। वर्ष 2018 से 2021 तक के बिलों संबंधी शुरू हुई यह जांच 2013 सेशन के बिलों तक पहुंच गई है। इस जांच के दौरान 800 के करीब संदिग्ध बिल पाए जा चुके हैं, जो 107 अलग-अलग लोगों के नाम पर तैयार किए गए थे। इन 107 में से 40 की पहचान हो गई है। इनमें 16 यूनिवर्सिटी मुलाजिम, जबकि बाकी 24 बाहर के हैं। कुल 107 मुलाजिमों में से पहचान किए 40 के अलावा 67 आरोपियों की पहचान होना अभी बाकी है। वीसी के मुताबिक इनमें से ज्यादातर आरोपी यूनिवर्सिटी के बाहर के होने की संभावना है।
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