फतेहगढ़ साहिब स्थित रोजा शरीफ के संचालक खलीफा सय्यद पाकिस्तान श्रद्धालुओं के साथ।
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रोजा शरीफ में स्थित हजरत शेख अहमद फारुकी सरहिंदी मजद्दी अल्फसानी की मजार पर 27 नवंबर से शुरू तीन दिवसीय 404वां वार्षिक उर्स दुआ के बाद संपन्न हो गया। उर्स मेले के दौरान श्रद्धालुओं को नोटबंदी का सामना करना पड़ा और दुकानदारों की दुकानदारी फीकी रही।
कई दशकों से उर्स पर दुकान लगाने वाले बुजुर्ग मोहम्मद अब्बास ने कहा कि पिछले उर्स के मुकाबले इस बार कमाई आधे से कम रही। दूसरी ओर पाकिस्तान से आए 125 श्रद्धालुओं का जत्था नोटबंदी से अछूता नहीं रहा। इस बारे में जब जत्थे से बातचीत की गई तो श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रशासन की ओर से जितनी सख्ती बरती गई उतनी पहले कभी नहीं। जत्थे में दूसरी, तीसरी बार आए श्रद्धालुओं का ने कहा कि उनको गेट से बाहर जाने की आज्ञा नहीं थी और लंगर में जो उन्हें खाने को दिया जाता, उसी से गुजारा करना पड़ा।
रोजा शरीफ के खलीफा सैय्यद मोहम्मद सादिक रजा मुजद्दी ने कहा कि यह श्रद्धालुओं की सुरक्षा का मामला है, इसलिए कोई परेशानी महसूस नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से रोजा शरीफ में श्रद्धालुओं को हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध करवाई गई। थाना मुखी फतेहगढ़ साहिब नवदीप सिंह ने कहा कि पुलिस की ओर से रोजा शरीफ में श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखा गया जिससे कोई परेशानी न हो।