पंजाब सरकार की ओर से सोमवार को विधानसभा में पेश किया पहला बजट प्रदेश में शिक्षा व सेहत संबंधी मसलों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जो एक बेहद सराहनीय कदम है और इसका सभी वर्गों की ओर से स्वागत किया जाना चाहिए। लेकिन सरकार के सामने पंजाब पर चढ़े तीन लाख करोड़ के कर्ज को उतारने के साथ-साथ आय बढ़ाने को लेकर चुनौतियां रहेंगी। पंजाब में रोजाना आत्महत्याएं कर रहे किसानों के लिए बजट में कर्ज माफी के लिए कुछ नहीं है। वहीं बजट में स्कूली शिक्षा को ऊंचा उठाने की तरफ जोर दिया गया है, जबकि कालेजों व यूनिवर्सिटियों को कम ग्रांट मिली है।
आप सरकार ने एक लाख 55 हजार 860 करोड़ का प्रस्तावित बजट पेश किया है। सरकार दावा कर रही है कि पिछले बजट की तुलना में यह 14 प्रतिशत अधिक है। लेकिन पूर्व सरकार ने 2021-22 में पेश किए एक लाख 68 हजार करोड़ के प्रस्तावित बजट में से एक लाख 55 हजार करोड़ खर्च किया था, जो 14 प्रतिशत कम खर्च था। इससे साफ है कि यह गारंटी नहीं है कि सरकारें प्रस्तावित बजट जितना ही खर्च करें। बजट में राजकोषीय घाटा 3.78 प्रतिशत और आय घाटा 1.9 प्रतिशत है। ऐसे में सरकार के लिए इस साल पंजाब पर चढ़े कर्ज को कम करना संभव नहीं लग रहा है। सरकार को अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए बहुत कुछ करने की जरूरत है। यह बजट खास तौर से शिक्षा व सेहत सेक्टर से जुड़ा है। हालांकि बजट में स्कूली शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने और शिक्षा के स्तर को ऊंचा करने पर ज्यादा जोर दिया गया है।
कालेजों व यूनिवर्सिटियों के लिए ज्यादा बजट का प्रावधान नहीं किया है। पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी की बात करें तो केवल 200 करोड़ की ग्रांट दी है। जो पिछले बजट की तुलना में भी सात करोड़ कम है। बजट में नए डिग्री कालेज खोलने के लिए 95 करोड़, पोस्ट मैट्रिक स्कालरशिप के लिए 640 करोड़, मेडिकल शिक्षा के लिए 1033 करोड़ के बजट का प्रावधान है। सरकार का मोहल्ला क्लीनिक खोलने का फैसला गरीबों के लिए फायदेमंद रहेगा। लेकिन सरकारी अस्पतालों व डिस्पेंसरियों में चिकित्सा सेवाएं मजबूत की जाएं। वहां स्टाफ की भर्ती की जाती और मरीजों को मुफ्त दवाओं व टेस्टों की सुविधा मुहैया की जाती।
पंजाब में खेतीबाड़ी सेक्टर के मौजूदा संकट को देखते हुए घोषित किए 11 हजार 560 करोड़ का बजट कम है। प्रदेश में रोजाना किसान आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्याएं कर रहे हैं। ऐसे में किसानों की कर्ज माफी के लिए बजट में कुछ नहीं कहा गया। हालांकि मुफ्त बिजली सब्सिडी के लिए 6947 करोड़ का एलान किया है। बजट में 36000 कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने के लिए 540 करोड़, नए पदों के लिए 714 करोड़ के बजट के प्रावधान और 10 हजार पुलिस मुलाजिमों की भर्ती के फैसले स्वागत योग्य हैं।
औद्योगिक सेक्टर के लिए 3163 करोड़ का बजट है, जो गत वर्ष के मुकाबले 48 फीसदी अधिक है। लेकिन सरकार को युवकों के लिए रोजगार के साधन पैदा करने पर जोर देना होगा। सुविधा केंद्रों पर भले ही 425 सेवाएं मिलेंगी, लेकिन इस समय इन केंद्रों में आने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसे दूर करने पर ध्यान देने की जरूरत है। यह पहली सरकार है, जिसने अपने बजट में ट्रांसपोर्ट माफिया पर नकेल कसने की बात कही है। जरूरत है कि अब इस दिशा में काम हो, जिससे सरकारी ट्रांसपोर्ट मुनाफे में आ सके।
- प्रोफेसर बलविंदर सिंह टिवाणा, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं पटियाला पंजाबी यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र विभाग के पूर्व हेड।