मोहाली। फेज-6 जिला सिविल अस्पताल में शनिवार को राष्ट्रीय सेहत मिशन के तहत काम कर रहे मुलाजिम हड़ताल पर चले गए। इनमें फार्मासिस्ट, एएनएम, नर्स, टीबी डिपार्टमेंट और आईडीडीपी (इंटीग्रेटेड डिजीज डेवलपमेंट प्रोग्राम) के कर्मचारी शामिल हैं। इस वजह से टीबी, डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, डायरिया, कोरोना वायरस टेस्ट के लिए सैंपल देने वाले मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। इतना ही नहीं मुफ्त में दवाइयां देने वाली शाखा पर भी ताला लग गया है।
वहीं ओपीडी में डॉक्टरों की ओर से मरीजों के लिए लिखी गई दवा निजी दुकानों से महंगे दाम में खरीदनी पड़ी। जहां आईडीडीपी (इंटीग्रेटेड डिजीज डेवलपमेंट प्रोग्राम) के टेक्निकल स्टाफ की ओर से दिन में 50 से 60 डेंगू के मरीजों की टेस्टिंग और कोरोना वायरस की सैंपलिंग करने के बाद रिपोर्ट बनाई जाती थी। अब रिपोर्ट लेने के लिए मरीजों को हड़ताल खत्म होने तक का इंतजार करना होगा। अस्पताल कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से अस्पताल प्रशासन को दिक्कत शुरू हो गई है। बिना इन विभागों के दवा नहीं मिलने के कारण डॉक्टरों का काम करना मुश्किल हो गया है।
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का नेतृत्व कर रही टेक्निकल स्टाफ की दीपिका सरपाल ने बताया कि पूरे मोहाली में आईडीडीपी के टेक्निकल स्टाफ के 100 कर्मचारी काम कर रहे हैं, जो कि पिछले दो साल में कोरोना काल के बावजूद काम कर रहे हैं। जिन्हें कम तनख्वाह दी जा रही है, वहीं लंबे समय से पक्का होने का इंतजार कर रहे हैं। हमारे साथ लगते फार्मासिस्ट, एएनएम, नर्स, टीवी डिपार्टमेंट के कर्मचारी अपने मांगों को लेकर हड़ताल पर बैठने को मजबूर हैं। मुलाजिमों ने बताया कि एनएचएस के 12000 मुलाजिमों को राजस्थान, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु की सरकारों की तर्ज पर स्थायी किया जाए। वहीं हरियाणा सरकार की तर्ज पर नियमानुसार स्थायी मुलाजिमों की तरह पूरी तनख्वाह दी जाए। अस्पताल के एसएमओ डॉ. विजय भगत ने बताया कि मुलाजिमों की हड़ताल से दिक्कत आई है। हमने बाहर से मुलाजिम लेकर काम चलाने की कोशिश की है। उम्मीद है कि मुलाजिम जल्द ही काम पर लौट आएंगे।