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विजिलेंस ने धर्मसोत का मांगा सात दिन का रिमांड, वकील के विरोध पर मिले तीन दिन

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मोहाली। वन विभाग के पद पर रहकर पेड़ों की कटाई और अधिकारियों की ट्रांसफर को लेकर रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार पूर्व वन मंत्री साधू सिंह धर्मसोत, ओएसडी चमकौर सिंह और पंजाबी अखबार के पत्रकार एवं शिवसेना प्रधान कमलजीत सिंह को विजिलेंस ने मंगलवार शाम को अदालत में पेश किया। इस दौरान विजिलेंस के वकीलों ने अदालत में केस की आगामी जांच का हवाला देकर सभी आरोपियों के सात दिन के रिमांड की मांग की। साथ ही तीनों आरोपियों की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि यह केस एक अन्य केस में गिरफ्तार किए आरोपी की डिस्क्लोजर स्टेटमेंट और उसकी एक डायरी के आधार पर दर्ज किया गया है। विजिलेंस ने बिना जांच पड़ताल के केस दर्ज किया है और इसमें ज्यादा दिनों का रिमांड नहीं दिया जाना चाहिए। वहीं दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को अदालत ने तीन दिन के विजिलेंस रिमांड पर भेज दिया है।
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जिला अदालत में सुनवाई शाम करीब पौने पांच शुरू हुई, इसमें विजिलेंस के वकीलों ने दलील रखी कि विजिलेंस ने हाल ही में एक केस में गिरफ्तार किए डीएफओ गुरअमनप्रीत सिंह और ठेकेदार हरमोहिंदर सिंह से पूछताछ, बरामद की गई उसकी डायरी और विजिलेंस जांच के आधार पर केस दर्ज किया है। जबकि एक सीजन के दौरान खैर के पेड़ों की कटाई को लेकर दिए सात हजार पेड़ों की कटाई को लेकर करीब 70 लाख रुपये रिश्वत दिए जाने की बात सामने आई है। जांच में यह भी सामने आया है कि डीएफओ की ट्रांसफर को लेकर 10 से 20 लाख रुपये, रेंजर्स की ट्रांसफर के लिए पांच से आठ लाख, ब्लॉक अधिकारी की ट्रांसफर के लिए पांच लाख रुपये और फोरेस्ट गार्ड से दो-तीन लाख रुपये रिश्वत की बात सामने आई है।
इसके अलावा 486 एकड़ जमीन पर अवैध खनन की बात भी सामने आई है। ठेकेदार के बयान और उसकी बरामद डायरी के आधार पर विजिलेंस विभाग ने दो पूर्व वन मंत्रियों सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वहीं केस की जांच को आगे बढ़ाने के लिए विजिलेंस की ओर से आरोपियों के सात दिन के रिमांड की मांग की गई थी।
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इस पर पूर्व मंत्री साधू सिंह धर्मसोत के वकील एचएस धनोआ ने विजिलेंस ने आरोपियों के सात दिन की रिमांड का विरोध किया और दलील दी कि विजिलेंस ने इसी तरह के एक अन्य केस में गिरफ्तार किए आरोपी की डिस्क्लोजर स्टेटमेंट और उसकी एक डायरी के आधार यह केस दर्ज किया है। विजिलेंस के केस दर्ज करने से पहले जांच नहीं की गई। ठेकेदार से बरामद डायरी में कहीं भी पूर्व मंत्री साधू सिंह धर्मसोत का नाम तो क्या उनका फोन नंबर तक नहीं है। फिर किस आधार पर पूर्व मंत्री साधू सिंह धर्मसोत को आरोपी बनाया गया है। जिस डायरी को आधार बनाकर विजिलेंस ने केस दर्ज किया है यह कोई लीगल कागजात नहीं है। ये तो ठेकेदार की हिसाब किताब की डायरी है और इसमें पूर्व मंत्री के नाम पर रिश्वत का कही कोई जिक्र नहीं है। धनोआ ने कहा कि साधू सिंह धर्मसोत पांच बार विधायक रह चुके हैं और पूर्व मंत्री रहे हैं, इनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में केस दर्ज करना सही नहीं है।
पत्रकार प्रति पेड़ कटाई के 500 रुपये लेकर पहुंचाता था पूर्व मंत्री को
विजिलेंस ने अदालत में दलील दी है कि इस मामले में आरोपी पंजाबी अखबार के पत्रकार एवं शिवसेना प्रधान कमलजीत सिंह पूर्व वन मंत्री साधू सिंह धर्मसोत का ओएसडी बनकर काम करता था। प्रति पेड़ 500 रुपये के हिसाब से इकट्ठी होने वाली रकम को कमलजीत सिंह पूर्व मंत्री साधू सिंह धर्मसोत को पहुंचाने का काम करता था। ये पूरा काम कमलजीत सिंह अफसरों और ठेकेदार की मदद से करता था। दूसरी ओर, पत्रकार कमलजीत की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि कमलजीत एक नामी अखबार का पत्रकार है और इस मामले में उसका कोई लेना-देना नहीं है।
मुझे गलत फंसाया है : साधू सिंह धर्मसोत
मंगलवार को अदालत में पेशी के बाद बाहर मीडिया से बातचीत में पूर्व वन मंत्री साधू सिंह धर्मसोत ने कहा कि इस मामले में मेरा कोई लेना देना नहीं है। दरअसल सीएम भगवंत मान ने 10 मई को बयान दिया था कि जल्द ही एससी स्कॉलरशिप घोटाले का खुलासा करेंगे। जबकि स्कॉलरशिप में तो सीएम भगवंत मान को कुछ नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने वन विभाग को अपना सहारा बनाकर यह केस दर्ज करवाया है। जिस ठेकेदार और डायरी के आधार पर विजिलेंस ने मेरे खिलाफ केस दर्ज किया है, उसमें मेरा नाम तक नहीं है। जबकि पत्रकार कमलजीत सिंह और चमकौर सिंह से कोई लेना-देना नहीं है।
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