खरड़। आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन ने सोमवार को सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के आवास का घेराव करने का फैसला लिया था। लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां तक नहीं पहुंचने दिया। इसके बाद उन्होंने खरड़ बस स्टैंड के पास से गुजर रहे नेशनल हाईवे-5 पर जाम लगा दिया। वहीं, दूर तक लगे इस जाम से हाईवे पर वाहनों के पहिए रुक गए। सबसे ज्यादा दिक्कत खरड़ के पास स्थित रिहायशी सोसायटीज में रहने वाले लोगों को उठानी पड़ी। इस दौरान लोग घटों अपने घर तक पहुंचने के लिए धक्के खाते रहे।
जानकारी के मुुताबिक आंगनबाड़ी वर्करों की ओर से डेढ़ बजे खरड़ बस स्टैंड चौक पर सड़क पर जाम लगाया गया था। इसके बाद पुलिस ने बस स्टैंड चौक से अस्पताल जाने वाली सड़क को बैरिकेडिंग करके रोक दिया। इस तरह मुख्यमंत्री के घर की तरफ जाने वाली गली को बंद कर दिया गया। इसके अलावा खरड़-बनूड हाईवे पर आवाजाही रुकी रही। इसी तरह बलौंगी से खरड़ जाने वाले रोड पर देसूूूमाजरा से खरड़ के रिहायशी एरिया में जाने वाली सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। आंगनबाड़ी वर्कर शाम करीब 5 बजे रोड से हटे। लेकिन यातायात सामान्य होने पर दो घंटे और लग गए और इस तरह 6 घंटे यातायात प्रभावित रहा। यूनियन की राज्य प्रधान हरजीत कौर पंजोला के नेतृत्व में संघर्ष चला।
वहीं, सीटू के जनरल सचिव चंद्र शेखर ने कहा कि केन्द्र सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के अनुसार निजीकरण और बड़ी राष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य जनरल सचिव सुभाष राणी ने कहा कि पिछले लंबे समय से आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर लगातार अपनी जायज मांगों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तीन से छह साल के बच्चों के चहुंमुखी विकास की जिम्मेदारी आंगनबाड़ी केन्द्रों की ओर से दी जाने वाली संगठित बाल विकास सेवाओं में 6 सेवाओं के रूप में तय की गई है। उन्होंने कहा कि 2 अक्तूबर 1975 से चली आ रही इस योजना से कुपोषण जैसे भयानक रोग पर काबू पाने में सफलता प्राप्त हुई है। लेकिन आज सरकार की नीतियों के कारण यह योजना खुद ही कुपोषित हो गई है। दूसरी ओर पंजाब सरकार ने इस योजना और इससे जुड़े हुए तीन से छह साल तक के बच्चों के चहुंमुखी विकास को रोक दिया है। असल में केन्द्र और राज्य सरकारें इस योजना को चलाने से अपने हाथ पीछे खींच रही हैं। सरकार द्वारा ऐसा पेश किया जा रहा है कि सरकार कुपोषण जैसे रोग को लेकर बहुत चिंतित है, परंतु बार-बार विशेषज्ञों द्वारा बताए जाने के बावजूद भी सरकार पूरा बजट देने को तैयार नहीं है।
उन्होंने कहा कि 21 सितंबर 2017 को पंजाब कैबिनेट में प्री प्राईमरी कक्षाएं शुरू करने का फैसला लिया गया था और इसके बाद शिक्षा सचिव कृष्ण कुमार द्वारा तीन से छह साल के बच्चों को स्कूलों में दाखिल करने के दिशा निर्देशों ने पिछले 46 साल से बच्चों के चहुंमुखी विकास के लिए केन्द्रीय योजना आईसीडीएस के आखिरी सांसों पर लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 46 साल से चल रही आईसीडीएस स्कीम को पंजाब सरकार ने बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सत्ता में आने से पहले काफी विद कैप्टन कार्यक्रम में कैप्टन सरकार ने वादा किया था कि यदि कांग्रेस पार्टी की सरकार सता में आएगी तो आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों को न्यूनतम वेतन के साथ जोड़ा जाएगा। लेकिन न्यूनतम वेतन देना तो बड़ी दूर की बात है, उन्होंने न्यूनतम मान भत्ता में ही कटौती कर दी। उन्होंने बताया कि लगभग 1223 दिनों तक दिन रात संघर्ष करने के बाद यह कटौती बहाल हो पाई है जिसका बकाया अक्तूबर 2018 से बाकी है। इस स्कीम को आंगनबाड़ी केन्द्रों में दोबारा शुरू करने के लिए 17 मार्च से लगातार पूर्व शिक्षा मंत्री विजय इंद्र सिंगला की रिहायश पर धरना चल रहा था और सरकार में हुए फेरबदल के कारण इस धरने को 12 अक्तूबर से चंडीगढ़ में तबदील कर दिया था। लेकिन 237 दिन बीत जाने के बाद भी कई बैठकें तो हुई परंतु कोई हल नहीं निकल सका। इस कारण आंगनबाड़ी वर्करों और हेल्परों में भारी रोष है।