कुलप्रीत कौर ने बताया कि वह और उसके पति करनाल छोड़कर मोहाली आ गए। वहां उनका मोबाइल का कारोबार था। इसके बाद उन्होंने मोहाली के फेज-7 की मार्केट में चाप का काम शुरू किया। थोड़ी मेहनत के बाद यह खूब चल निकला। अच्छी खासी आमदनी होने लगी।
दिक्कतें भी आईं, लेकिन पीछे नहीं हटे
अंग्रेज सिंह ने बताया कि यूके जाने का मौका नहीं मिलने के बाद हम दोनों ने जिंदगी को फिर से ट्रैक पर लाने के लिए फास्ट फूड और स्पेशल चाप की दुकान लगाई। विदेश जाने की तैयारी में काफी पैसा खर्च हुआ था। किसी तरह से एक लाख रुपये का बंदोबस्त किया और दुकान बनाने में खर्च कर दिया। अब हमारा काम अच्छा चल रहा है। अंग्रेज ने बताया कि इसका श्रेय मैं अपनी पत्नी कुलप्रीत कौर को दूंगा। क्योंकि खाना बनाने का पूरा काम वही करती है। इसके साथ ही मेरे हर फैसले में मेरा साथ देती है। मुझे और मेरे परिवार को कुलप्रीत पर गर्व है।
पहले कई कॉरपोरेट हाउस में काम कर चुकी है कुलप्रीत
कुलप्रीत कौर ने बताया कि वह एसएसएसी आईटी है। वह कई कॉरपोरेट हाउस के अलावा कॉलेजों में भी काम कर चुकी है। उन्होंने बताया कि वह हमेशा मेहनत के लिए आगे रहती है। उसका पहले से ही यह सपना था कि वह खुद वर्किंग रहे। ऐसे में वह अपने पति के साथ मिलकर काम कर रही हैं और इस काम में व्यस्त रहकर बहुत खुश हैं।