जानकारी के मुताबिक अफसर बने कैडेट 5वें एएफपीआई कोर्स का साल 2015 में हिस्सा बने थे। इसके बाद उनकी ट्रेनिंग और सिलेक्शन प्रक्रिया हुई। 2017 में नेशनल डिफेंस अकादमी खड़कवासला में 138वें एनडीए कोर्स के हिस्से के तौर पर शामिल हुए। एनडीए में तीन साल के कड़े प्रशिक्षण के बाद वह सर्विस प्रशिक्षण के अंतिम साल के लिए आईएमए में शामिल हुए।
39 कैडेटों के नौवें कोर्स ने हाल ही में अपने दो साल का प्रशिक्षण पूरा किया है। यूपीएससी की ओर से मेरिट सूची जारी होने के तुरंत बाद इस कोर्स के चुने गए कैडेट जल्द ही एनडीए में शामिल हो जाएंगे।
10वें कोर्स के 50 कैडेट 12वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं और इस साल सितंबर में एनडीए की दाखिला परीक्षा देंगे। 42 कैडेटों का 11वां कोर्स हाल ही में एएफपीआई में शामिल हुआ है और पिछले महीने प्रशिक्षण की शुरूआत की गई थी।
कोविड में भी नहीं रुका ट्रेनिंग कायर्क्रम
कोविड-19 के कारण पिछले साल मार्च से लेकर आखिर तक पूरी ट्रेनिंग ऑनलाइन है। सख्त पाबंदियों के बावजूद, जनवरी 2020 से मई 2021 की समय-सीमा के दौरान इंस्टीट्यूट करीब 28 कैडेटों को एनडीए और अन्य अकादमी में भेजने के योग्य हुआ है।
इस साल से एएफपीआई की ओर से लंबे समय से प्रतीक्षित कैडेट ट्रेनिंग विंग प्रोग्राम की शुरूआत की गई है। इस कार्यक्रम के जरिये पंजाब के अलग-अलग चुनिंदा स्कूलों के छात्रों का चयन हुआ।
संस्थान के कैडेट केवल अकादमियों में नहीं बल्कि देश की सीमा पर भी अपनी बहादुरी दिखा रहे हैैं। कई अवॉर्ड भी उन्होंने अपने नाम किए हैं। लेफ्टिनेंट हरप्रीत सिंह को मार्च 2020 में ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकेडमी में स्वॉर्ड ऑफ ऑनर और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया था। लेफ्टिनेंट गुरवंश सिंह गोसल (सिख रेजिमेंट) को दिसंबर 2018 में इंडियन मिलिट्री अकेडमी में कांस्य पदक से सम्मानित किया गया था।
एएफपीआई के पूर्व कैडेट जो अब अधिकारियों के तौर पर सेवाएं निभा रहे हैं, वह भी कई अवार्ड जीत चुके हैं। कैप्टन विश्वदीप सिंह जो स्पेशल फोर्सेज में हैं, उनको जनवरी 2021 में बहादुरी के लिए सेना मेडल और लेफ्टिनेंट जसमीत सिंह बामरा जैक राइफल्स को गलवान घाटी में ऑपरेशन के लिए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ ने प्रशंसा पत्र दिया गया।