मोहाली। नगर निगम के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। स्थानीय निकाय विभाग ने उन्हें नोटिस जारी किया है। उन पर आरोप है कि वह एक सोसायटी के सदस्य हैं और उस सोसायटी को ही नगर निगम के विकास कार्यों से जुड़े काम अलॉट हुए हैं। निकाय विभाग ने उन्हें 15 दिन में अपनी स्थिति साफ करने के लिए कहा है। नोटिस का जवाब नहीं देने पर उन्हें अपना पार्षद पद भी गंवाना पड़ सकता है।
कुछ समय पहले नगर निगम के पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी, रविंदर सिंह बिंद्रा, करमजीत कौर, अरुणा शर्मा, गुरमीत कौर, सरबजीत कौर और पूर्व पार्षद फूल राज सिंह व आरपी शर्मा ने स्थानीय निकाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को शिकायत दी थी। उनका आरोप था कि मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू वित्त एवं ठेका कमेटी के चेयरमैन हैं। उन्होंने अमृतप्रीत कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड को नगर निगम के विकास कार्यों के काम अलॉट किए हैं। वह खुद उस सोसायटी के सदस्य हैं। सोसायटी को काम देकर उन्होंने पंजाब म्यूंसिपल एक्ट-1976 की धारा-63 का उल्लंघन किया है क्योंकि कोई भी चुना हुआ पार्षद ऐसे किसी फैसले में शामिल नहीं हो सकता है जिससे उसका कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष हित जुड़ा हो।
यह लिखा है नोटिस में
नोटिस में कहा गया है कि मेयर ने नगर निगम की वित्त एवं ठेका कमेटी का चेयरमैन होते हुए अमृतप्रीत कोआपरेटिव सोसायटी को विकास कार्य के टेंडर जारी करके म्यूंसिपल एक्ट की धारा 63 का उल्लंघन किया है। पंजाब म्यूंसिपल एक्ट की धारा 36 (1) अनुसार धारा-63 का उल्लंघन होने पर पार्षद को पद से उतारे जाने का उपबंध है। नोटिस में लिखा गया है कि मेयर द्वारा की गई कार्रवाई एक्ट की धाराओं से विपरीत है। उन्हें पार्षद के पद से हटाने का प्रस्ताव है। ऐसे में नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा जा रहा है। 15 दिन में प्रमुख सचिव को जवाब भेजा जाए। कार्रवाई से पहले उनके जवाब पर विचार किया जाएगा। नोटिस में यह भी कहा है कि अगर मेयर चाहते हैं तो वह किसी भी कामकाज वाले दिन केस से संबंधित रिकार्ड नगर निगम के दफ्तर या स्थानीय निकाय विभाग के दफ्तर में आकर देख सकते हैं। रिकॉर्ड न देखने की सूरत में लिखित जवाब समय से न भेजने की सूरत में समझा जाएगा कि वह अपनी सफाई में कुछ कहना नहीं चाहते हैं। इसके बाद उनके खिलाफ बनती कार्रवाई की जाएगी।
पंजाब में भाजपा के इकलौते मेयर
पंजाब में सिर्फ मोहाली नगर निगम में भाजपा का मेयर है। कुछ समय पहले वह अपने भाई पूर्व सेहत मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। नगर निगम के मेयर अमरजीत सिंह जीती सिद्धू को पार्षद पद से हटाने के नोटिस के बाद चर्चा छिड़ गई एक तरफ सरकार भाजपा पर ऑपरेशन लोटस द्वारा आम आदमी के विधायकों की खरीद-फरोख्त करने के आरोप लगा रही है। वहीं अब स्थानीय सरकार ने भाजपा के इकलौते मेयर को निशाने पर ले लिया है।
ऐसे बने थे अमरजीत सिंह जीती सिद्धू मेयर
गत वर्ष हुए नगर निगम के चुनाव में नगर निगम के 50 वार्डों में कांग्रेस के 37 पार्षद जीते थे। आजाद ग्रुप और आप के खाते में 12 वार्ड और एक वार्ड निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गया था। पहली बार अलग होकर चुनाव मैदान में उतरे भाजपा और शिरोमणि अकाली दल खाता भी नहीं खोल पाए थे। इसके बाद कांग्रेस की तरफ से अमरजीत सिंह जीत सिद्धू मेयर बने थे। हालांकि इसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया और राज्य में आप की सरकार बनी। इसके बाद मेयर व उनके भाई ने भाजपा ज्वाइन कर ली थी। हालांकि उनके साथ अभी तक कांग्रेस के किसी भी पार्षद ने भाजपा ज्वाइन नहीं की है। कांग्रेस का एक गुट उन्हें बाहर से समर्थन कर रहा है, जबकि दूसरा उनके विरोध में है।
कोट
अभी तक नोटिस की कॉपी नहीं मिली है। कॉपी मिलने के बाद जवाब दूंगा। अगर जरूरत पड़ी तो सरकार के खिलाफ अदालत में जाऊंगा। -अमरजीत सिंह जीती सिद्धू, मेयर