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जमीन का कम मुआवजा मिलने से किसान नाराज, एनएच 205 ए हाईवे का विरोध शुरू

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खरड़। नेशनल हाईवे अथॉरिटी की ओर से निकाले जा रहे राष्ट्रीय राज मार्ग एनएच- 205 ए के लिए अधिग्रहण की जाने वाली जमीन का मुआवजा कम देने से किसान नाराज हैं। इस संबंधी सरकार की ओर से सुनाए गए अवॉर्ड का किसानों और जमीन मालिकों की ओर से विरोध किया जा रहा है। किसानों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार की ओर से किसानों व जमीनों के मालिकों को बाजार के दरों के अनुसार जमीनों के रेट नहीं दिए गए तो इसका विरोध किया जाएगा।
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गौरतलब है कि तहसील मोहाली व तहसील खरड़ के अलग-अलग गांवों के बीच से आईटी पार्क दैड़ी से लेकर कुराली-खरड़ हाईवे को मिलता हाईवे निकाला जा रहा है। गांव रूड़की के सरपंच अमरजीत सिंह, सर्बजीत सिंह ढींढसा, सुखविंदर सिंह, दर्शन सिंह, कमलप्रीत सिंह, हरमनदीप सिंह, काका सिंह, सतविंदर सिंह, बहादुर सिंह, सुखविंदर सिंह, बंत सिंह, बलविंदर सिंह, जसविंदर सिंह, अमरीक सिंह, शेर सिंह, परमजीत सिंह, उमराव सिंह, जसबीर सिंह, बहादुर सिंह व हरजीत सिंह समेत अन्य लोगों ने बताया कि गांव रूड़की, गांव मांमुपुर, बजहेड़ी, पीर सोहाना, चोल्टा खुर्द, गुडाणा, गीदड़पुर, गीगेमाजरा, रंगियां, मछली कलां, पोपना, मोयेमाजरा व ढोलपुर समेत कई अन्य गांवों की जमीन इस बाईपास के लिए अधिग्रहण की जा रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से गांवों की जमीनों का भाव देने संबंधी जो अवॉर्ड सुनाए हैं, वह बहुत ही कम हैं। यह किसानों व जमीनों के मालिकों को मंजूर नहीं हैं। जब खरड़-लुधियाना हाईवे को चौड़ा करने के लिए जमीन अधिग्रहण की गई थी तो उस समय गांव रूड़की को 2 करोड़ 27 लाख रुपये मुआवजा प्रति एकड़ दिया गया था परंतु अब 1 करोड़ 8 लाख रुपये व गांव मांमुपुर को दो करोड़ रुपये की बजाय अब केवल 92 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया जा रहा है। इसी तरह अन्य गांवो को भी जमीनों के बहुत कम रेट दिए जा रहे हैं।
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किसानों ने बनाई संघर्ष की योजना
सड़क यातायात व राजमार्ग मंत्रालय की ओर से नेशनल हाईवे 205 ए को लेकर पंजाब सरकार की ओर से घोषित किए जमीनों के कम रेटों से किसानों में रोष है। इसके विरोध में किसानों ने संघर्ष की योजना बनाई है।
मोहाली जिले में आईटी सिटी चौंक से कुराली-चण्डीगढ़ सड़क तक एन एच 205 ए हाईवे बनाया जा रहा है जोकि एयरपोर्ट सड़क को सीधा हिमाचल प्रदेश से जोड़ने का काम करेगा। इस हाईवे पर लगभग 28 गांवों के किसानों की लगभग 400 एकड़ जमीन सरकार की ओर से बहुत ही कम रेटों में अधिग्रहण की जा रही है। सरकार द्वारा अलग-अलग गांवो की जमीनों का रेट अलग-अलग घोषित किया गया है। गौरतलब है कि पंजाब सरकार की ओर से जमीन रेट तय करने के लिए कलेक्टर रेट को आधार माना गया है जो कि बहुत ही कम है। वहीं, गांवों के किसानों की कभी राय नहीं ली गई।
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