मोहाली। नेशनल हेल्थ मिशन के अधीन सरकारी अस्पतालों में कार्यरत कर्मचारियों को पिछले दो महीनों से वेतन जारी नहीं किया गया, जिसके चलते अब हजारों की संख्या में कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। दूसरी ओर, एनएचएम कर्मचारियों की ओर से कोविड प्रोटोकॉल के चलते प्रदर्शन तो नहीं किए जा रहे परंतु काम पर न जाकर पंजाब सरकार के खिलाफ रोष जाहिर कर रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, जिले के सरकारी अस्पताल और डिस्पेंसरियों में नेशनल हेल्थ मिशन के तहत हजारों की संख्या में कर्मचारी काम करते हैं और दो अलग-अलग श्रेणियों में कर्मचारियों को भर्ती किया गया है। पंजाब सरकार द्वारा कर्मचारियों की भर्ती रेगुलर और ठेकेदारी सिस्टम तहत की गई है, जिसमें रेगुलर कर्मचारियों के मुकाबले ठेकेदारी सिस्टम के तहत काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या ज्यादा है।
दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन द्वारा दोनों ही कर्मचारियों से एक समान काम तो लिया जाता है परंतु दोनों श्रेणियों को वेतन देने में भेदभाव किया जाता है। आलम यह है कि पिछले करीब डेढ़ महीने से एनएचएम कर्मचारी पंजाब सरकार द्वारा लागू नए 6ठें पे-कमीशन को लेकर सरकार के खिलाफ काम छोड़कर हड़ताल पर थे जो आचार संहिता के लागू होने के बाद खत्म हो गई।
ठेके पर काम करने वालों के साथ करती है सौतेला व्यापार
एनएचएम कर्मचारियों की एसोसिएशन के प्रेस सचिव हरपाल सोढ़ी ने बताया कि पंजाब सरकार की कथनी और करनी में अंतर हैं, क्योंकि कहती कुछ है और करती कुछ है। सोढ़ी ने बताया कि लंबे समय से एनएचएम के तहत पंजाब सरकार की ओर से रेगुलर और ठेकेदारी सिस्टम के अधीन कार्यरत कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर कर रहे हैं परंतु चुनाव आचार संहिता के बाद हड़ताल खत्म हो गई। दूसरी ओर, पंजाब सरकार द्वारा रेगुलर काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन तो जारी कर दिया परंतु ठेकेदारी सिस्टम के अधीन कार्यरत कर्मचारियों का वेतन रोक दिया है। इसलिए अब उनकी हड़ताल वेतन न जारी करने को लेकर शुरू की गई है। प्रेस सचिव हरपाल सोढ़ी ने कहा कि हम काम तो एक जैसा ही करते हैं, लेकिन सरकार हमारे साथ वेतन देने में सौतेला व्यवहार करती है।