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शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह हत्याकांड: एनआईए अदालत में आठ पर आरोप तय, 20 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

Wed, 01 Sep 2021 02:07 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली (पंजाब)

सार

अक्तूबर 2020 में तरनतारन के भिखीविंड में शौर्यचक्र विजेता बलविंदर सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उन्हीं के स्कूल में वारदात को अंजाम दिया गया था। एनआईए अदालत में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 सितंबर को होगी। 
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शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू - फोटो : फाइल
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विस्तार
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शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू हत्याकांड में मंगलवार को आठ आरोपियों पर आरोप तय किए गए। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईआईए) की विशेष अदालत में हुई सुनवाई के दौरान सुखदीप सिंह, गुरजीत सिंह, सुखमीत पाल, इंद्रजीत सिंह, सुखराज सिंह के खिलाफ धारा 302, 120बी, आर्म्स एक्ट व गैर-कानूनी गतिविधियों (यूएपीए एक्ट) के तहत आरोप तय हुए जबकि जगरूप सिंह, आकाशदीप व रवि ढिल्लों पर धारा 201, 212 व आर्म्स एक्ट तहत केस चलेगा। मामले की अगली सुनवाई 20 सितंबर तय की गई है।

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अक्तूबर, 2020 में बलविंदर सिंह संधू की भिखीविंड में उनके स्कूल में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हत्या में खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स (केएलएफ) का नाम आने के बाद जांच एनआईए को सौंपी गई थी। एनआईए ने केएलएफ से जुड़े 8 आरोपियों गुरदासपुर निवासी सुखराज सिंह सुक्खा उर्फ लखनपाल, सुखदीप सिंह बूरा उर्फ भूरा, हुसैनपुर लुधियाना निवासी रविंदर सिंह उर्फ रवि, जनकपुरी लुधियाना निवासी आकाशदीप अरोड़ा उर्फ धालीवाल, सुभाष नगर लुधियाना निवासी जगरूप सिंह, तरनतारन के गांव रशीआना निवासी इंदरजीत सिंह उर्फ इंदर और गैंग के मुखिया भिखीविंड निवासी सुखमीत पाल सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

बलविंदर सिंह ने 1990 में ऐसे किया था आतंकियों को ढेर
सितंबर 1990 में आतंकी पंजवड़ ने 200 साथियों के साथ बलविंदर सिंह के घर पर हमला किया था। इसमें रॉकेट लांचर का भी इस्तेमाल हुआ था। आतंकवादियों ने बलविंदर के घर को चारों तरफ से घेर लिया था। उनके घर की तरफ जाने वाले सभी रास्ते भी बंद कर दिए थे ताकि पुलिस व अर्धसैनिक बल मदद को न आ सकें। 
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पांच घंटे चली इस मुठभेड़ में पंजवड़ भाग खड़ा हुआ था और उसके कई गुर्गे मारे गए थे। घर में बनाए गए पक्के बंकरों से परिवार के सभी सदस्यों ने स्टेनगन सरीखे हथियारों से आतंकवादियों का बहादुरी से मुकाबला किया था। इसके बाद बलविंदर सिंह का नाम सुर्खियों में आ गया था। 1993 में गृह मंत्रालय की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने बलविंदर सिंह, उनके बड़े भाई रंजीत सिंह और उनकी पत्नियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया था।

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