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पंजाब: पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी की मुश्किलें बढ़ीं, भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज

Wed, 04 Aug 2021 02:09 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)

सार

विजिलेंस के अधिकारियों के मुताबिक, जिस मकान को किराए पर देने के लिए सुमेध सिंह सैनी से एग्रीमेंट हुआ था, वह भी मानकों के अनुसार नहीं था। इसमें केवल मकान मालिक और किराएदार के हस्ताक्षर हैं। गवाह के हस्ताक्षर नहीं हैं, जबकि नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में बाकायदा एफिडेविट के साथ ई-स्टैंप लगती है। साथ ही दो गवाह बनाए जाते हैं जबकि इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की मुश्किलें फिर से बढ़ने लगी हैं। बेअदबी और कोटकपुरा गोलीकांड के मामले का वे अभी सामना कर ही रहे हैं कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और पद के दुरुपयोग के मामले में एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरु कर दी है। विजिलेंस ब्यूरो की फ्लाइंग स्क्वॉड-1 ने सैनी और पांच अन्य लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। 

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अन्य पांच आरोपियों में पीडब्ल्यूडी के कार्यकारी इंजीनियर निम्रतदीप सिंह, सुरिंदर जीत सिंह, अजय कौशल, प्रद्युम्न सिंह और अमित सिंगला शामिल हैं। विजिलेंस ने सैनी की गिरफ्तारी के लिए सोमवार को चंडीगढ़ स्थित उनकी कोठी समेत कई जगह दबिश दी लेकिन सुमेध सैनी नहीं मिले।

जानकारी के मुताबिक, विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज केस में कहा गया है कि निम्रतदीप सिंह के परिवार ने एक अप्रैल, 2004 से 10 दिसंबर, 2020 तक करीब 35 अचल संपत्तियां बनाईं। इनमें चंडीगढ़ के सेक्टर-20 की कोठी नंबर 3048 भी शामिल है। निम्रतदीप सिंह के पिता सुरिंदरजीत सिंह ने अपनी कोठी का फर्स्ट फ्लोर ढाई लाख रुपये के हिसाब से 11 महीने के लिए सुमेध सिंह सैनी को किराए पर दिया था। यह एग्रीमेंट 15 अक्तूबर, 2018 को हुआ था। एफआईआर में 11 महीने का कुल किराया 27.5 लाख रुपये दर्ज किया गया है लेकिन यह भी कहा गया है कि एग्रीमेंट के शुरू होने से पहले ही सैनी ने 40 लाख रुपये सिक्योरिटी मनी और 2 महीने का एडवांस किराया 5 लाख रुपये उन्हें दे दिया था। 

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सैनी की ओर से इस दौरान कुल 45 लाख का भुगतान किया गया, जो 11 महीने के किराए से ज्यादा है। इसके अलावा सैनी ने अगस्त, 2018 से अगस्त, 2020 तक सुरिंदरजीत सिंह के खाते में 6.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जोकि रेंट डीड के नियमों और शर्तों के मुताबिक नहीं है। वहीं, सैनी ने दो करोड़ रुपये का अन्य भुगतान भी किया।

सैनी जिसमें रह रहे, वह कोठी अदालत ने कर रखी है अटैच
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2020 में विजिलेंस ने एक रियल स्टेट प्रोजेक्ट से जुड़े प्रोजेक्ट में कंपनी प्रबंधकों- निम्रतदीप सिंह और सुरिंदरजीत सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार एक्ट की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इन पर आरोप था कि चो के रास्ते में रिहायशी कालोनी बसा दी गई। इस केस की 16 जुलाई, 2021 को सुनवाई हुई तो जिला अदालत ने चंडीगढ़ स्थित उस कोठी को अस्थायी रूप से अटैच करने के आदेश दिए थे, जहां पर सैनी किराए पर रह रहेहैं। इसके साथ ही अदालत ने यह आदेश भी दिया था कि सैनी ढाई लाख रुपये का जो मासिक किराया देते हैं, वह भी सरकारी खजाने में जमा किया जाए। इस तरह विजिलेंस ने अपनी एफआईआर में कहा है कि सितंबर 2020 में निम्रतदीप सिंह और उसके पिता को तीन नोटिस भेजे गए थे। इनमें उन्होंने दो का जवाब दिया था। इनमें उन्होंने कहा था कि उनका किराएदार से संपर्क नहीं हो पा रहा है, वह दिल्ली में हैं। इसके बाद एक और नोटिस उन्हें दिया गया था, जिसका वह कोई उचित जवाब नहीं दे पाए।

एग्रीमेंट में पेंच, बस दो लोगों के ही हस्ताक्षर
विजिलेंस के मुताबिक, जिस मकान को किराए पर देने के लिए सैनी से एग्रीमेंट किया गया था, वह भी मानकों के अनुसार नहीं था। इसमें केवल मकान मालिक और किराएदार के हस्ताक्षर हैं। किसी भी गवाह के हस्ताक्षर नहीं हैं जबकि नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में बाकायदा एफिडेविट लगता है और उस पर ई-स्टांप लगती है। साथ ही दो गवाहों हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया है।

निम्रतदीप के परिवार के 22 बैंक खातों में करोड़ों रुपये
ब्यूरो की अब तक की जांच में निम्रतदीप सिंह के परिवार के करीब 22 बैंक खातों का पता चला है। इनमें चार करोड़ 88 लाख 4 हजार 934 रुपये जमा हैं। इसके अलावा करीब 11 करोड़ 18 लाख 78 हजार रुपये की एफडी है। वहीं, 2 करोड़ 12 लाख 6 हजार 825 रुपये की विदेशी करेंसी खरीदी गई है। इसके अलावा करीब 10 करोड़ बैंक खातों के माध्यम से फुटकर खर्च किए गए हैं।
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