सैनी की ओर से इस दौरान कुल 45 लाख का भुगतान किया गया, जो 11 महीने के किराए से ज्यादा है। इसके अलावा सैनी ने अगस्त, 2018 से अगस्त, 2020 तक सुरिंदरजीत सिंह के खाते में 6.40 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जोकि रेंट डीड के नियमों और शर्तों के मुताबिक नहीं है। वहीं, सैनी ने दो करोड़ रुपये का अन्य भुगतान भी किया।
सैनी जिसमें रह रहे, वह कोठी अदालत ने कर रखी है अटैच
उल्लेखनीय है कि सितंबर 2020 में विजिलेंस ने एक रियल स्टेट प्रोजेक्ट से जुड़े प्रोजेक्ट में कंपनी प्रबंधकों- निम्रतदीप सिंह और सुरिंदरजीत सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार एक्ट की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। इन पर आरोप था कि चो के रास्ते में रिहायशी कालोनी बसा दी गई। इस केस की 16 जुलाई, 2021 को सुनवाई हुई तो जिला अदालत ने चंडीगढ़ स्थित उस कोठी को अस्थायी रूप से अटैच करने के आदेश दिए थे, जहां पर सैनी किराए पर रह रहेहैं। इसके साथ ही अदालत ने यह आदेश भी दिया था कि सैनी ढाई लाख रुपये का जो मासिक किराया देते हैं, वह भी सरकारी खजाने में जमा किया जाए। इस तरह विजिलेंस ने अपनी एफआईआर में कहा है कि सितंबर 2020 में निम्रतदीप सिंह और उसके पिता को तीन नोटिस भेजे गए थे। इनमें उन्होंने दो का जवाब दिया था। इनमें उन्होंने कहा था कि उनका किराएदार से संपर्क नहीं हो पा रहा है, वह दिल्ली में हैं। इसके बाद एक और नोटिस उन्हें दिया गया था, जिसका वह कोई उचित जवाब नहीं दे पाए।
एग्रीमेंट में पेंच, बस दो लोगों के ही हस्ताक्षर
विजिलेंस के मुताबिक, जिस मकान को किराए पर देने के लिए सैनी से एग्रीमेंट किया गया था, वह भी मानकों के अनुसार नहीं था। इसमें केवल मकान मालिक और किराएदार के हस्ताक्षर हैं। किसी भी गवाह के हस्ताक्षर नहीं हैं जबकि नियमों के मुताबिक, ऐसे मामलों में बाकायदा एफिडेविट लगता है और उस पर ई-स्टांप लगती है। साथ ही दो गवाहों हस्ताक्षर होते हैं, लेकिन इस मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया है।
निम्रतदीप के परिवार के 22 बैंक खातों में करोड़ों रुपये
ब्यूरो की अब तक की जांच में निम्रतदीप सिंह के परिवार के करीब 22 बैंक खातों का पता चला है। इनमें चार करोड़ 88 लाख 4 हजार 934 रुपये जमा हैं। इसके अलावा करीब 11 करोड़ 18 लाख 78 हजार रुपये की एफडी है। वहीं, 2 करोड़ 12 लाख 6 हजार 825 रुपये की विदेशी करेंसी खरीदी गई है। इसके अलावा करीब 10 करोड़ बैंक खातों के माध्यम से फुटकर खर्च किए गए हैं।