मोहाली। देश की रक्षा में सरहदों पर जान कुर्बान करने वाले सैनिकों की विधवाओं व पारिवारिक सदस्यों को सरकारी योजनाओं का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्हें योजनाओं का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। वीरवार को यह बात मोहाली में पूर्व सैनिकों की विधवाओं व पारिवारिक सदस्यों ने पत्रकारों के साथ बातचीत में कहीं।
एयरफोर्स के पूर्व जूनियर वारंट अफसर करनैल सिंह बैदवान के सोहाना स्थित निवास स्थान पर 1962, 65 और 71 व केंद्रीय लड़ाई में शहीद सैनिकों के करीब बीस परिवारों के सदस्यों ने शिरकत की। पीड़ित परिवारों ने कहा कि सैनिकों की शहीदी के मौके पर राज्य सरकार की ओर से सम्मान के तौर पर दस-दस एकड़ जमीन देने की घोषणा की गई थी लेकिन 40-45 वर्ष बाद भी बाद भी वादे पूरे नहीं किए गए। बेशक लंबा सघर्ष करके 2016 में शिरोमणि अकाली दल सरकार ने कुछ कदम उठाए थे लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ। आम आदमी पार्टी ने भी सत्ता में आने से पहले कई वादे किए थे लेकिन अभी तक सबकुछ अधूरा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि जो पंचायती जमीनें खाली करवाई जा रही हैं। वह युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के परिवारों को मुुहैया करवाई जाए। शहीदों के परिवारों को एक करोड़ ग्रैच्युटी अनुदान और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। इस मौके पर हरनेक सिंह, गुरमीत सिंह काका, इंद्रजीत लांडरां, सुरजीत कौर अल्होरा समेत कई शहीद पारिवारिक सदस्य भी उपस्थित रहे।