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आखिर खुल गए सरकारी स्कूल... खुश हुए बच्चे, पर कम ही पहुंचे

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मोहाली/नयागांव। कोरोना की दूसरी लहर के थमने के बाद सोमवार को सभी सरकारी स्कूल खुल गए। इस दौरान पहली से लेकर 12वीं कक्षाएं लगी। स्कूलों में कोरोना से निपटने के लिए पूरे इंतजाम किए गए थे। जहां तक छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से भी कम रही। जबकि निजी स्कूल नहीं खुले। अधिकतर पेरेंट्स बच्चों को स्कूलों में भेजने के पक्ष में नहीं है। पेरेंट्स का कहना है कि पहले बच्चों का टीकाकरण किया जाए, इसके बाद भी स्कूल खोलने की दिशा में कदम उठाए जाएं। सरकारी सेकेंडरी स्कूल नयागांव की प्रिंसिपल मनप्रीत कौर ने कहा कि स्कूल खोलने के बाद बच्चों में एक खुशी का माहौल है। काफी दिनों के बाद बच्चे आज स्कूल आए हैं। इस कारण बच्चों में खुशी के साथ-साथ उत्साह भी देखने को मिल रहा है। ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ एक तरीका हो सकती है वह कोई पढ़ाई का स्थायी तरीका नहीं हो सकता।
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इसी तरह सरकारी प्राइमरी स्कूल नयागांव के प्रिंसिपल करमजीत सिंह ने कहा कि बच्चों की उपस्थिति तो लगभग प्रतिशत से कम ही रही है। अगर उपस्थिति बढ़ती है तो हम आधे-आधे बच्चों को बुलाने का विकल्प भी चुन सकते हैं। स्कूल में हमने बच्चों के लिए हाथ धोने, सैनिटाइजर जैसी व्यवस्था की गई है। अध्यापक एवं दूसरे सभी कर्मचारी कोरोना का वैक्सीन ले चुके हैं। सामाजिक दूरी का ध्यान रखा जाएगा और हम सख्ती से स्कूल में कोरोना गाइडलाइन का पालन करवा रहे हैं।
क्या कहते पीजीआई के डायरेक्टर
पीजीआई की ओर से सीरो सर्वे किया गया था। इस सर्वे में पाया गया था कि तकरीबन 70 प्रतिशत बच्चों के अंदर पहले से ही एंटीबॉडी मौजूद है। इसका मतलब है कि यह बच्चे कोरोना संक्रमण से बाहर निकल चुके हैं। ऐसे मे बीमारी फैलने का खतरा तो कम हैं। लेकिन हमें अभी पूरी सावधानी रखनी पड़ेगी। बच्चों को इस बीमारी से बचने के उपायों के बारे में जागरूक करना पड़ेगा। मेरा व्यक्तिगत मानना है की नियमों के साथ बच्चों के स्कूल खोल देने चाहिए। क्योंकि स्कूल न खुलने के कारण बच्चों के मानसिक एवं शारीरिक विकास पर भी असर पड़ रहा है।
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- प्रोफेसर जगत राम, निदेशक, पीजीआई चंडीगढ़।
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