मोहाली। तंबाकू, सिगरेट, पान गुटखा, पान मसाला और सुपारी आदि का इस्तेमाल भारत में कैंसर का मुख्य कारण है। कैंसर बीमारी का इलाज संभव पर है, पर इस बीमारी का समय से पता लगना चाहिए। इसकी समय से जांच बहुत जरूरी है। यह बात सिविल सर्जन डॉ. आदर्श पाल कौर कंग ने विश्व कैंसर रोकथाम दिवस के मौके पर कहीं। इस मौके पर जिले की सभी सेहत संस्थाओं में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस बार कैंसर दिवस मनाने का विषय क्लोज द केयर गैप रखा गया है। उन्होंने कहा कि कम आमदन और कम विद्यक योग्यता वाले लोगों को कैंसर का समय पर इलाज करवाने में दिक्कत आती है। अगर लोग जागरूक होंगे तो इस बीमारी को आसानी से खत्म किया जा सकेगा।
सिविल सर्जन ने कहा कि भारत में कैंसर पीड़ित सौ मरीजों में से 40 मरीजोें में कैंसर का कारण तंबाकू का इस्तेमाल करना है। छह किस्म के बड़े कैंसर का कारण तंबाकू ही है। उन्होंने कहा कि कैंसर की बीमारी हर उम्र के व्यक्ति हो सकती है। कैंसर की मुख्य किस्मों में मुंह, नाक, कान, गले, हड्डियां पेट की आंत, खून और महिलाओं में स्तन कैंसर होना शामिल है। अगर शरीर में किसी किस्म की रसौली या गांठ बनने का अहसास हो तो तुरंत जांच करवानी चाहिए। समय-समय पर स्क्रीनिंग न होने से समस्या रहती है। सिविल सर्जन ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर की बात करें तो 80 फीसदी खतरा अकेले तंबाकू के इस्तेमाल से होता है। भारत में 80 फीसदी कैंसर के रोगियों की बीमारी का पता बाद में लगता है। जब तक इलाज करना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा कि समय से कैंसर की पहचान कर इलाज हो जाए तो खतरनाक बीमारी के बोझ को कम किया जा सकता है। सेहत विभाग इस जानलेवा बीमारी के खात्मे के लिए अपने तौर हर संभव प्रयास करता आ रहा है।
कैंसर के मुख्य लक्षण
अगर कोई पुराना जख्म ठीक नहीं हो रहा है। भूख कम लगती है, बिना किसी वजह से वजन कम होता है। कब्ज रहती है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इसके अलावा जिन घरों में पहले माता-पिता या दादा-दादी या और करीब रिश्तेदारों को कैंसर हो चुका है तो उन्हें भी सावधान रहने की जरूरत है।