मोहाली प्रशासन की ओर से दिवाली के त्योहार पर पटाखे चलाने के लिए ड्रॉ निकालकर 40 लोगों को पटाखे बेचने के अस्थायी लाइसेंस जारी किए गए थे लेकिन जिले में पटाखे बेचने की छोटी-बड़ी 4 हजार से ज्यादा दुकानें बुधवार को ही लग गईं। निर्धारित जगह की अपेक्षा अपनी पसंदीदा जगह पर दुकानदारों ने स्टाल लगाए हैं लेकिन न तो पुलिस ने उन पर कोई कार्रवाई की और न ही प्रशासन ने कोई दबाव ही बनाया। जबकि रही सही कसर शाम को पूरी हो गई जब लोगों ने जमकर आतिशबाजी की। हालांकि अधिकारी इस मामले में बोलने से बचते रहे और उनका कहना है कि नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक जिला प्रशासन ने फेज-8 में पटाखों के 14 स्टाल लगाने के लाइसेंस जारी किए गए थे। लेकिन दिवाली से पहले ही फेज-8 में 20 से ज्यादा स्टाल लग गए। लेकिन जिला प्रशासन ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं, दूसरी ओर सेक्टरों और साथ लगते गांवों में धड़ल्ले से दुकानें लगीं। इस कारण अलॉटी दुकानदारों ने जिला प्रशासन की ढीली कार्रवाई पर रोष प्रकट किया और कहा कि प्रशासन पर कार्रवाई न करने के लिए राजनीतिक पार्टियों का दबाव हो सकता है।
इसका खामियाजा लाइसेंस लेने वाले दुकानदारों को भुगतना पड़ा है। हालांकि माहौल गर्माने पर नगर निगम की टीम ने बुधवार शाम को जांच की और जिनके पास लाइसेंस नहीं थे, उनका सिर्फ नाम लिखकर छोड़ दिया गया है और दुकानें बंद नहीं करवाई गई और न ही कोई कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि दुकानदारों में एक शहर के सत्ताधारी गुट के पार्षद के परिजनों की भी दुकान थी, जहां पर टीम ने सिर्फ खानापूर्ति की और चली गई।