मोहाली। एयरपोर्ट से सटे गांव बाकरपुर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल में करीब 250 साल पुराना बरगद का पेड़ आंधी में अचानक गिर गया। हालांकि पेड़ रात के समय गिरने के चलते किसी भी तरह का जानी नुकसान होने से बचाव हो गया। स्कूल की इमारत पूरी तरह से सुरक्षित है।
यह घटना दिन में होती तो कई कई बच्चे हादसे का शिकार हो सकते थे। बागवानी विभाग ने पेड़ का मुआयना किया है। रविवार को पेड़ को हटाने की योजना है। स्कूलों प्रबंधन ने कुछ दिन पहले ही शिक्षा विभाग को इसकी फोटो भेजकर इस बारे में सूचित किया था।
गांव बाकरपुर स्थित सरकारी सीसे स्मार्ट स्कूल काफी पुराना है। स्कूल के ग्राउंड में यह पेड़ प्राइमरी सेक्शन की तरफ था। जहां पर करीब 190 विद्यार्थी पढ़ाई करते है। लोगों के मुताबिक वीरवार रात को यह गिरा है। किसी समय इसी पेड़ के नीचे ही विद्यार्थियों की कक्षाएं तक लगती थीं लेकिन समय बीतने के साथ यह कमजोर पड़ गया था। इसके तने और जड़ों को कीड़ा लग गया था। ऐसे में बारिश और तेज आंधी में पेड़ गिर गया। पेड़ गिरने के बाद गांव की पंचायत ने इसका जायजा लिया। पसवक कमेटी की तरफ से इस बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है।
पेड़ के नीचे लगती थीं पंचायतें
गांव में 1960 में किसानों और कुछ सरकारी कार्यों के लिए जमीन बांटी गई थी। इसके बाद से इस पेड़ को देखा जा रहा है। स्कूल एक कमरे से शुरू हुआ है। वहीं इसे सीनियर सेकेंडरी बनने में काफी साल लगे। इसके अलावा उक्त बरगद के पेड़ के नीचे पंचायतें भी लगती थीं।
क्या कहते हैं लोग
कभी पेड़ के नीचे लगती थी कक्षाएं
आजादी के बाद जब यहां सरकारी इमारतों के लिए जमीन रखी गई थी। तब इस बरगद के पेड़ के नीचे ही अध्यापक बच्चों को पढ़ाया करते थे। वहीं इस बार मानसून की शुरुआत में ही यह पेड़ टूटना शुरू हो गया। वहीं इससे पहले इस पेड़ को कभी नुकसान नहीं हुआ। अब इसे जल्द कटवाया जाएगा। -जगतार सिंह, सरपंच बाकरपुर
पिता और मैं इस पेड़ के नीचे पढ़े
मेरे पिता और मैं इसी स्कूल से पढ़े हैं। तब से हम पेड़ को ऐसे ही देख रहे हैं। इससे रिश्ता बन गया था। वीरवार रात की आंधी में जब यह गिरा तो बहुत दुख हुआ। हमारे गांव के सबसे पुराने पेड़ों में से गिना जाता है। वैसे तो गांव में काफी हरियाली है लेकिन पेड़ कटने का अफसोस तो होता ही है। -जगदेव सिंह, वासी बाकरपुर
काफी पुराना है पेड़
सरकारी स्कूल के पुराने पेड़ के अलावा एक और बरगद का पेड़ है जो गांव के बीचों बीच लगा हुआ है। लेकिन वहां काफी जगह है। 1988 में मैंने स्कूल छोड़ा था। तभी यह पेड़ वैसा था जैसा कुछ दिन पहले दिखाई देता था। हमारे बुजुर्ग भी बोलते थे कि पेड़ काफी पुराना है। -जसविंदर सिंह, पंच
शुक्र है... बच्चे सुरक्षित हैं
मैंने भी इसके नीचे बैठकर पढ़ाई की हैं। हम शुक्र मनाते हैं कि इसकी वजह से किसी बच्चे को कोई नुकसान नहीं हुआ। इसके साथ ही स्कूल के इमारत भी सुुरक्षित है। अब इसे काटा जाएगा लेकिन यहां इसी का पौधा लगाया जाएगा जो इस समय यहीं स्कूल के अंदर लग रहा है। -परमिंदर सिंह, प्रधान गुरुद्वारा साहिब
क्या कहते हैं अधिकारी
कुछ दिन पहले इस पेड़ को कुछ नहीं हुआ था। दो दिन पहले इसका एक हिस्सा गिरा हुआ मिला। इसका एक बड़ा हिस्सा अभी भी प्राइमरी स्कूल की इमारत के ऊपर है। इस वजह से हम बच्चों को स्कूल नहीं बुला रहे है। बागवानी विभाग वाले इसे पेड़ को देखने आए थे। उन्होंने कहा कि इसकी पहले नीलामी होगी। उसके बाद भी लंबी प्रक्रिया है। विभाग को चाहिए था कि वह जल्द इसे काटकर इमारत को सुरक्षित करें। -जसबीर सिंह, हेड मास्टर प्राइमरी स्कूल
चंडीगढ़ में हुए हादसे के बाद सात दिन पहले जब राज्य सरकार ने स्कूलों में लगे पुराने पेड़ों की सूची मांगी थी। ऐसे में हमने स्कूल से पांच पेड़ों की जानकारी फोटो समेत भेजी थी। जो पेड़ गिरा है, वह सबसे बड़ा था। बाकी के पेड़ छोटे और सूखे हैं। एक दिन पहले ही बागवानी विभाग के अधिकारी इसका मुआयना करके गए हैं। उनके मुताबिक रविवार तक पेड़ को काटा जाएगा। -दमनप्रीत कौर, प्रिंसिपल सीनियर सेकेंडरी स्मार्ट स्कूल बाकरपुर