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रक्षा बंधन: कौन थे शहीद रेडियो आपरेटर कमलजीत सिंह, जिनकी समाधि को 53 साल से बांधी जा रही राखी

Mon, 19 Aug 2024 05:40 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)

सार

1971 भारत पाक जंग में देश के लिए शहीद होने वाले रेडियो आपरेटर नायक कमलजीत सिंह की समाधि को 53 साल से राखी बांधी जा रही है। रक्षा बंधन पर शहीद कमलजीत सिंह की समाधि को राखी बांधने की परंपरा से जुड़ी कहानी भावुक कर देगी।  
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शहीद नायक कमलजीत सिंह की समाधि पर राखी बांधती हुई गांव सिंबल की बहनें। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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रक्षा बंधन का पर्व हो और बहन को भाई की याद न आए यह तो हो नहीं सकता। कच्चे धागों की डोर से बंधे भाई बहन के प्यार और इस पावन रिश्ते से बढ़कर कोई अन्य रिश्ता दुनिया में नहीं है। बहन की मांगी हुई दुआएं मुसीबत की घड़ी में भाई की रक्षा करती हैं। 

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इसी अटूट रिश्ते के बंधन में बंधी एक अभागी बहन जालंधर निवासी अमृतपाल कौर अपने शहीद भाई की स्मृतियां जहन में समेटे हुए भारत-पाक सीमा की जीरो लाइन पर बसे गांव सिंबल की बीएसएफ की पोस्ट पर बनी 1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद होने वाले अपने इकलौते भाई रेडियो ऑपरेटर नायक कमलजीत सिंह की समाधि पर पिछले 43 वर्षों से निरंतर राखी बांधती आ रही थी, मगर 8 वर्ष पहले भाई बहन के इस अटूट बंधन का 44वां वर्ष पूरा होने से कुछ दिन पहले अमृतपाल कौर की सांसों की डोर टूट गई। वह दो महीने कैंसर से लड़ते हुए इस दुनिया को छोड़ गई।

शहीद भाई की समाधि पर राखी बांधने की परंपरा को बरकरार रखते हुए उस साल अमृतपाल कौर की चचेरी बहन अमितपाल कौर ने सिंबल पोस्ट पर जाकर अपने चचेरे भाई शहीद कमलजीत सिंह की समाधि पर राखी बांधी थी और पोस्ट पर मौजूद बीएसएफ के जवानों व शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के सदस्यों को उन्होंने यह वचन दिया था कि इस परम्परा को वह आगे बढ़ाएंगी। लेकिन, अफसोस उसके बाद वह दोबारा इस पोस्ट पर राखी बांधने नहीं आई।
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अमृतपाल कौर ने परिषद से लिया था वचन 
शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविन्द्र सिंह विक्की ने बताया कि मरने से तीन दिन पहले जब वह अपनी परिषद के सदस्यों के साथ जालंधर के एक अस्पताल में शहीद की बहन अमृतपाल कौर का हाल जानने गए तो उसने परिषद के सदस्यों से यह वचन लिया था कि उनके द्वारा पिछले 43 वर्षों से अपने भाई की समाधि पर राखी बांधने की शुरू की गई परंपरा रुकनी नहीं चाहिए, चाहे उनके परिवार का कोई दूसरा सदस्य बेशक यहां न पहुंचे। 

गांव की बेटियां निभा रही परंपरा
इसी वचन की डोरी से बंधे परिषद के सदस्यों ने एक नई परंपरा की शुरुआत करते हुए बहन अमृतपाल कौर के दुनिया को अलविदा कहने के बाद सरहदी गांव सिंबल की बेटियों को साथ लेकर शहीद नायक कमलजीत सिंह की समाधि पर राखी बांधने की रस्म को पिछले 8 वर्षों से बाखूबी जारी रख शहीद की बहन को दिए बचन को निभा रहे हैं। इस बार जहां जिस गांव सिंबल को बचाते हुए कमलजीत ने शहादत पाई थी, उस गांव की मनप्रीत कौर, हरप्रीत कौर, हरमन कौर, संदीप कौर, मनदीप कौर व मनप्रीत कौर ने परिषद सदस्यों व शहीद परिवारों के साथ कमलजीत की समाधि पर रेशम की डोरी बांध अमृतपाल द्वारा 52 वर्ष पहले शुरू की गई परंपरा को बरकरार रखा वहीं उन्होंने पोस्ट पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के जवानों को भी राखी बांध देश की सुरक्षा का बचन लिया।

पाक सेना ने किया था कमलजीत का सिर कलम
कुंवर रविंदर विक्की ने बताया कि 4 दिसंबर 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान पाक सेना ने जब इस पोस्ट पर हमला किया तो नायक कमलजीत ने आखिरी गोली व अंतिम सांस तक पाक सेना का मुकाबला किया, लेकिन पाक सैनिकों की संख्या अधिक होने के कारण वो कमलजीत को बंदी बनाकर ले गए। पाक ने वहशियाना हरकत को अंजाम देते हुए पाक सेना ने उनका सर कलम कर इस पोस्ट पर मौजूद बेरी के पेड़ पर लटका दिया। शहीद के माथे पर एक स्लिप चिपका दी जिस पर लिखा था पाक सेना की तरफ से सीमा सुरक्षा बल को तोहफा। 

बेरी का पेड़ पाक सेना की दरिंदगी का गवाह
बेरी का यह पेड़ कमलजीत के बलिदान के 53 वर्षों बाद आज भी इस पोस्ट पर सही सलामत खड़ा पाक सेना की दरिंदगी की गवाही दे रहा है। पाक सेना की इस हरकत से जोश से लबरेज सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने पाक सेना को धूल चटाते हुए अपने साथी रेडियो ऑपरेटर नायक कमलजीत के बलिदान का बदला ले लिया।

शहीद कमलजीत को मसीहा के रूप में पूजते हैं गांव के लोग
मनप्रीत कौर व हरप्रीत कौर ने नम आंखों से बताया कि गांव सिंबल के लोग कमलजीत सिंह को आज भी एक मसीहा के रूप में पूजते हैं। इसलिए वह भविष्य में भी इसी तरह अपने गांव के रक्षक भाई की समाधि पर राखी बांधती रहेंगी। इसके अलावा उन्होंने पोस्ट पर तैनात बीएसएफ के जवानों की कलाई पर राखी बांधकर उन्हें यह अहसास करवाया कि बेशक उनकी मुंह बोली बहन अमृतपाल कौर की सांसों की डोर टूटी है, मगर रक्षा बंधन का यह अटूट रिश्ता कभी नहीं टूटेगा।
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नहीं खली अपनी बहनों की कमी
इस अवसर पर बलिदानी नायक कमलजीत पोस्ट के कंपनी कमांडर इंस्पेक्टर लवजिन ने कहा कि इन सरहदी बहनों ने उनकी कलाई पर जो रक्षासूत्र राखी के रूप में बांधा है, यह एक कवच के रूप में हमारे जवानों की रक्षा करेगा। आज इन मुंह बोली बहनों ने हमारी कलाई पर राखी बांध हमें जो स्नेह दिया है, उससे हजारों मील दूर बैठी हमारी अपनी बहनों की कमी हमें नहीं खलने दी। हम अपनी इन बहनों को यह बचन देते हैं कि हम अपने खून की आखिरी बूंद तक इन सरहदों की रक्षा करते रहेंगे।
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