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यूक्रेन-रूस विवाद: लुधियाना के 150 में से 22 विद्यार्थी अब भी यूक्रेन में फंसे, परिवार वालों की चिंता बढ़ी

Sun, 06 Mar 2022 11:34 AM IST
निवेदिता वर्मा विकास मल्होत्रा, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

केंद्र सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया था कि जिन लोगों के बच्चे यूक्रेन में पढ़ने के लिए गए हैं वह प्रशासन से संपर्क करें। इसके बाद महानगर और आसपास के गांवों से 38 लोगों ने संपर्क किया, जिनमें से कुछ बच्चे तो वापस भी आ गए।
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यूक्रेन युद्ध। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रूस और यूक्रेन के बीच पिछले जारी युद्ध ने जहां दुनिया को चिंता में डाल रखा है वहीं भारत में भी चिंता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बड़ी तादाद में भारत के अलग-अलग कोने से छात्र मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गए हुए हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच जंग के बाद काफी बड़ी संख्या में छात्र वहां से लौट भी आए हैं। भारत की सरकार ने अपने चालीस के करीब केंद्रीय मंत्रियों के साथ साथ अधिकारी और स्टूडेंट्स को एयर लिफ्ट करने के लिए छह जहाज लगा रखे हैं।

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पीएम मोदी खुद इस मामले में रोजाना अधिकारियों से इनपुट ले रहे हैं और अपनी कैबिनेट के साथ उच्चाधिकारियों से मीटिंग कर रहे हैं, ताकि देश के बच्चों के किसी तरह से यूक्रेन से बाहर निकाला जाए। लुधियाना के करीब 150 बच्चे यूक्रेन में पढ़ाई करने के लिए गए हुए थे। 49 छात्र तो वापस आ गए थे, जबकि 41 छात्र ऐसे थे जो अलग-अलग देशों में पहुंच चुके हैं और यूक्रेन छोड़ चुके हैं। इसके साथ ही नौ छात्र अब भी यूक्रेन में हैं। मगर बाकी के 13 छात्रों का अभी कुछ पता नहीं है। भारत सरकार उन बच्चों का पता लगाने में जुटी है कि वह 13 बच्चे कहां पढ़ते थे और किस हालात में रह रहे हैं। 

केंद्र सरकार के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया था कि जिन लोगों के बच्चे यूक्रेन में पढ़ने के लिए गए हैं वह प्रशासन से संपर्क करें। इसके बाद महानगर और आसपास के गांवों से 38 लोगों ने संपर्क किया, जिनमें से कुछ बच्चे तो वापस भी आ गए। मगर उसके बाद केंद्र सरकार के आदेशानुसार प्रशासन ने दूसरी लिस्ट जारी की जिनमें यह बताया गया कि 112 बच्चे और थे और उनमें से 49 वापस आ चुके हैं, जबकि 41 बच्चे यूक्रेन छोड़ चुके हैं और रोमानिया, हंगरी और पोलैंड में हैं। वहां वह केंद्रीय मंत्रियों के संपर्क में हैं और उनके आने का रास्ता धीरे-धीरे साफ हो रहा है। 9 बच्चे यूक्रेन के अलग-अलग शहरों में फंसे हुए थे। जबकि 13 छात्र ऐसे थे जिनके बारे में प्रशासन को भी नहीं पता कि वह यूक्रेन में कहां रह रहे हैं। भारत सरकार इन बच्चों का पता लगाने में जुटी है। 
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डिप्टी कमिश्नर वरिंदर कुमार शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार के आदेश पर सारा काम किया जा रहा है। सरकार ने जो लिस्ट मांगी थी वह भिजवा दी थी। उन्हीं में पता चला था कि 13 बच्चों का अभी पता नहीं चल रहा है। उन बच्चों का पता लगाने में केंद्र सरकार लगी हुई है। अगर उनके पास कोई अपडेट आता है तो जरूर बता दिया जाएगा।

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