लुधियाना। मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के अलग अलग हिस्सों से अवैध हथियार लाकर महानगर और उसके आस-पास के इलाकों में सप्लाई करने वाले तीन आरोपियों को सीआईए वन पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी सोशल मीडिया के जरिये हथियार बेचते थे।
पुलिस ने आरोपियों को बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 32 बोर की दो रिवाल्वर, चार कारतूस, दो मैगजीन और तीन कंपनियों के मोबाइल फोन बरामद किए हैं। पुलिस ने इस मामले में जालंधर के गांव ललियां निवासी हिंदपाल सिंह, जालंधर बड़ालाव निवासी बलविंदर सिंह और हैबोवाल के चिट्टी कालोनी निवासी अर्जुन कुमार के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने आरोपियों को अदालत में पेश किया। जहां से उन्हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ करने में जुटी है। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सिमरतपाल सिंह ढींढसा ने बताया कि तीनों आरोपी सोशल मीडिया के जरिए नाजायज हथियारों का धंधा करते थे।
आरोपी हिंदपाल गिरोह का मुख्य सरगना है और आरोपी बलविंदर के साथ मिल मध्यप्रदेश से हथियार लाकर सप्लाई करता था। यह सभी मध्य प्रदेश से अवैध हथियार लाकर फेसबुक के जरिए ग्राहकों से सौदा करते थे। फेसबुक अकाउंट के माध्यम से ही उन्हें फोटो दिखाई जाती थीं व इसी माध्यम से सौदा तय किया जाता था।
इतना ही नहीं आरोपी हथियार सप्लाई करने की जगह भी सोशल मीडिया पर ही चुनते थे। लुधियाना में किसी ने हथियार मंगवाया था और आरोपी बस स्टैंड के पास उसे हथियार देने के लिए आए थे। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वह किसे इन हथियारों की डिलीवरी देने के लिए आए थे।
डीसीपी ने बताया कि आरोपी हिंदपाल पुराना और शातिर अपराधी है। उसके खिलाफ पंजाब के अलग अलग थानों में पहले से पांच आपराधिक मामले दर्ज है। जिनमें हत्या सहित नशा तस्करी के मामले शामिल हैं। वह हत्या के मामले में बीस साल की सजा भी काट चुका है और हाईकोर्ट से जमानत पर है।
वह फोन का काफी कम इस्तेमाल करता था। आरोपी हिंदपाल की आरोपी अर्जुन के साथ जेल में ही मुलाकात हुई थी। अर्जुन ने आरोपी हिंदपाल और बलविंदर सिंह को मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से अवैध हथियार खरीदने के लिंक बताता था।
हथियारों से जो मुनाफा आता था तीनों आरोपी आपस में बांट लेते थे। पुलिस पूछताछ के दौरान पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों का लिंक किस तरह के लोगों से है। इसके साथ साथ पुलिस कई एंगल पर जांच करने में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह हथियार किस लिए व किसके द्वारा इस्तेमाल किये जाने थे।