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आईआईटी रोपड़, एनआईटी श्रीनगर और एनआईटी जालंधर में आज होगा एमओयू

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रोपड़। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ और राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर, जेएंडके और एनआईटी जालंधर ने सहयोगात्मक अनुसंधान कार्यों, पीएचडी छात्रों की संयुक्त पर्यवेक्षण, संयुक्त कार्यशालाओं और सेमिनारों के साथ पारस्परिक हित के क्षेत्रों में अकादमिक और अनुसंधान गतिविधियों पर सहयोग के लिए आज एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
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एमओयू पर आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा और एनआईटी श्रीनगर के निदेशक प्रो. राकेश सहगल और जालंधर के डॉ. बीआर अंबेदकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरके गर्ग ने हस्ताक्षर किए। यह समझौता आईआईटी रोपड़ की एक पहलकदमी का हिस्सा है। जिसमें जिन एनआईटी से मेधावी छात्रों का स्वागत करने के लिए आईआईटी रोपड़ में अपने अंतिम सेमेस्टर (एस) लगाने, पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने और एक परियोजना करने की पहल का एक हिस्सा है।
छात्रों को एक कठोर चयन प्रक्रिया के माध्यम से जाना होगा, और उनकी निरंतर उत्कृष्टता के अधीन, आईआईटी रोपड़ में पीएचडी कार्यक्रमों में जल्द प्रवेश के लिए विचार किया जाएगा। समझौता ज्ञापन में अकादमिक और अनुसंधान गतिविधियों पर सहयोग के दायरे में पारस्परिक हित, छात्रों और संकाय के आदान प्रदान, अकादमिक सूचनाओं का आदान प्रदान, विद्वता से जानकारी, सामग्री और प्रकाशन और आईआईटी रोपड़ में पीएचडी के लिए एनआईटी श्रीनगर के छात्रों का प्रवेश शामिल है। प्रत्येक संस्था अपने एक सदस्य को कोआप्रेटिव कार्यक्रम के प्रभारी अपने प्रतिनिधि के रूप में मनोनीत करेगी।
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इस ज्ञापन के तहत कार्य के व्यक्तिगत कार्यक्रम की योजना बनाई जाएगी और दोनों दलों के प्रत्याशियों द्वारा आयोजित किया जाएगा।समझौते का स्वागत करते हुए आईआईटी रोपड़ के निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा, मुझे विश्वास है कि आईआईटी रोपड़ और एनआईटी श्रीनगर के बीच इस सहयोग से बड़े शोध कार्य होंगे जिससे आम जनता और जम्मू-कश्मीर के निवासियों को विशेष रूप से लाभ होगा । एनआईटी श्रीनगर के मेधावी छात्र अब अपने फाइनल ईयर में आईआईटी रोपड़ आ सकते हैं और ग्रेजुएशन के बाद पीएचडी के लिए पढ़ाई जारी रख सकते हैं।
एनआईटी श्रीनगर के निदेशक प्रोफेसर राकेश सहगल ने कहा, यह सहयोग जेएंडके में उद्योग के सामने आ रही बुनियादी समस्याओं के लिए प्रौद्योगिकी समाधान लाएगा और हमारे पीजी छात्रों, अनुसंधान विद्वानों और संकाय की मदद करेगा। इस सहयोगात्मक कदम से विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश में उद्योग जगत के सामने आने वाली समस्याओं के लिए नवीन और अभिनव समाधान खोजने में तालमेल आएगा। एनआईटी जालंधर के निदेशक प्रो. राजीव के गर्ग ने कहा, यह सहयोग राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन. ई. पी 2020) की दिशा में सकारात्मक रूप से कदम उठा रहा है और इससे विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सीमांत क्षेत्रों में नए ज्ञान के उत्पादन में मदद मिलेगी।
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