लुधियाना। केंद्र सरकार के तीन खेती बिलों के बाद पंजाब में भाजपा के खिसकते जनाधार से पार्टी नेताओं के राजनीतिक कैरियर पर सवालिया निशान लगता जा रहा है। ऐसे में भाजपा नेताओं के सामने अपना राजनीतिक कैरियर बचाने की होड़ लग चुकी है। उन्हें पता है कि किसान यूनियन के विरोध के चलते उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के दौरान भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा। इसका सीधा असर उनके राजनीतिक कैरियर पर रहेगा।
भाजपा नेताओं के सामने एक ही हल दिखाई दे रहा है कि वह किसी अन्य पार्टी में जाकर अपने राजनीतिक कैरियर को बचा सके। औद्योगिक नगर लुधियाना में भी कुछ यही हाल है, यहां से दो दिग्गज भाजपा नेता कमल चेतली और पूर्व डिप्टी मेयर आरडी शर्मा ने भाजपा को छोड़ने का ऐलान कर दिया है। वह किसी भी समय अकाली दल में शामिल हो सकते हैं। वहीं बठिंडा से भाजपा नेता मोहित गुप्ता और फिरोजपुर से सुखपाल सिंह नन्नू भी शिअद का दामन थामने की तैयारी कर चुके हैं।
तीन खेती कानूनों के खिलाफ किसान यूनियन एकजुट होकर संघर्ष कर रही है, इन यूनियन के निशाने पर सबसे ज्यादा भाजपा नेता हैं। यूनियन ने यह साफ कर दिया है कि चुनाव के दौरान वह भाजपा प्रत्याशियों को हराने का काम करेंगी। ऐसे में विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की तैयारी कर चुके भाजपा नेताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि कमल के फूल पर चुनाव कैसे लड़ेंगे। अपने राजनीतिक कैरियर को बचाने के लिए अब भाजपा नेता अन्य पार्टियों में अपनी राजनीतिक जमीन तलाशने में जुट चुके हैं। इसमें सबसे पहले अमृतसर से अनिल जोशी का नाम सामने आया था। इसके बाद लुधियाना से पूर्व डिप्टी मेयर आरडी शर्मा भी किसान कानूनों के खिलाफ विरोध में उतर आए थे। यहां बता दे कि आरडी शर्मा अमृतसर से अनिल जोशी के सबसे करीबी माने जाते हैं।
अश्वनी शर्मा भी नहीं मना सके नेताओं को
लुधियाना से आरडी शर्मा और कमल चेतली के पार्टी छोड़ कर अन्य पार्टी में शामिल होने की चर्चा जोरों पर थी। 18 अगस्त को भाजपा प्रदेश प्रधान अश्वनी शर्मा दोनों नेताओं से मनाने के लिए पहुंचे थे। लगभग दोनों नेताओं के साथ बंद कमरे में डेढ़ घंटा बैठक चली, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। दोनों नेताओं के तेवर अपनी पार्टी के खिलाफ रहे। आखिरकार वीरवार देर रात को दोनों नेताओं ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया।