बरनाला। कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब से शुरू हुए आंदोलन की मजबूती के लिए भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां और पंजाब खेत मजदूर यूनियन ने रविवार को बरनाला की अनाज मंडी में किसान-मजदूर एकता महारैली की। इस महारैली में पंजाब-हरियाणा सहित अन्य राज्यों से किसानों और मजदूरों ने भारी संख्या में शिरकत की, जिसमें भारी तादाद में महिलाएं भी पहुंचीं।
महारैली मंच से भाकियू एकता उगराहां के राज्य अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने सीधे तौर पर पीएम मोदी से कहा कि वह समझ रहे हैं कि पंजाब में किसानों का आंदोलन ठंडा पड़ गया है और किसान कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए अब पहले की तरह उग्र नहीं हैं। किसान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 27 फरवरी को दिखा देंगे कि कृषि कानूनों के खिलाफ उनके तेवर पहले की तरह सख्त हैं। इसी रणनीति के तहत महारैली में किसान जत्थेबंदियों के नेताओं ने संयुक्त रूप से 27 फरवरी को दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे मोर्चे में विशाल संख्या में किसानों से पहुंचने का अह्वान किया। इसके साथ ही फैसला किया गया कि इस बार किसान महिलाएं मोदी सरकार के खिलाफ 8 मार्च को महिला दिवस दिल्ली बॉर्डर पर ही मनाकर विरोध जताएंगी। 23 फरवरी को पंजाब व दिल्ली में चल रहे किसान मोर्चों में पगड़ी संभाल जट्टा लहर के नायक शहीद भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह का जन्मदिवस मनाया जाएगा।
मौकापरस्त पार्टियों से संघर्ष के लिए तैयार रहने का अह्वान
महारैली को संबोधित करते हुए जोगिंदर सिंह उगराहां ने कहा कि पंजाब में किसान आंदोलन को और ताकतवर बनाने के लिए खेत मजदूरों सहित अन्य संगठनों का इसमें शामिल होना जरूरी है। खेती बचाने के लिए उन्होंने मौकापरस्त सियासी पार्टियों से संघर्ष के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। भाजपा शासित केंद्र सरकार और कारपोरेट घरानों को आडे़ हाथ लेते हुए देश के किसानों-मजदूरों से एकजुट होने की अपील की। महारैली में उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किसानों को केंद्र सरकार तुरंत रिहा कर झूठे केस रद्द करे। साथ ही 26 जनवरी को शहीद हुए नौजवान नवरीत सिंह की मौत की उच्च स्तरीय जांच करवाकर आरोपियों को सख्त सजा दी जाए।
बहादुरी और धैर्य से आंदोलन को जीतने की उम्मीद
महारैली को संबोधित करते हुए संयुक्त किसान मोर्चे के नेता बलवीर सिंह राजेवाल ने कहा कि भाजपा शासन के खिलाफ कृषि कानून रद्द करवाने के लिए उनका यह आंदोलन ऐतिहासिक है। इसकी कामयाबी के लिए हर वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में डटे किसान अपनी बहादुरी व धैर्य के बलबूते विजयी होकर लौटेंगे। वहीं पंजाब खेत मजदूर यूनियन के सचिव लछमण सिंह ने कहा कि खेती कानून खेत मजदूरों का रोजगार छीन लेंगे।
महिलाएं हर कुर्बानी देने को तैयार : हरिंदर कौर
भाकियू एकता महिला विंग की नेता हरिंदर कौर ने कहा कि महिलाओं ने इस संघर्ष में अहम जिम्मेदारी निभाई है और किसान महिलाएं संघर्ष की आधार हैं। कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए महिलाएं हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। उन्होंने मजदूर नेता नौदीप कौर की गिरफ्तारी का सख्त विरोध करते हुए बिना शर्त उनकी रिहाई की मांग की। किसान यूनियन के सीनियर उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठू ने कहा कि यह संघर्ष पंजाब के सभी मेहनती वर्गों का संघर्ष है। उन्होंने पंजाब सरकार से कहा कि बादल सरकार के कार्यकाल में बनाए गए अनुबंध खेती कानूनों को तुरंत रद्द किया जाए। प्राइवेट थर्मलों के साथ किए समझौते रद्द होने चाहिए और किसानों-मजदूरों के कर्ज माफ करने के वादे पूरे किए जाएं।
इन किसान नेताओं ने किया संबोधित
मंच से भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के प्रधान जोगिंदर सिंह कोकरीकलां, सीनियर उपाध्यक्ष झंडा सिंह जेठूके, भाकियू राजेवाल के प्रधान बलवीर सिंह राजेवाल, पंजाब किसान यूनियन के प्रधान रूलदू सिंह मानसा, भाकियू कादियां पंजाब के नेता जसविंदर सिंह मंडेर, पंजाब किसान सभा के नेता बलदेव सिंह निहालगढ़, जमहूरी किसान सभा के नेता जसवंत सिंह संधू, पंजाब खेत मजदूर यूनियन के नेता लछमण सिंह नैणेवाल ने मोदी सरकार खिलाफ खुलकर भाषण दिया और कृषि कानून रद्द होने तक संघर्ष जारी रखने का एलान किया। मंच का संचालन किसान नेता सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने किया।
बरनाला में किसान-मजदूर महारैली दौरान उमड़ा जनसैलाब।- फोटो : BERNALA