लुधियाना। अचानक बढ़ी गर्मी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। चढ़ता पारा खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। गर्मी ऐसे ही बढ़ी तो फसल का झाड़ कम होने की आशंका है। बीते एक सप्ताह की बात करें तो पारा लगातार चढ़ रहा है। रविवार को अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस न होने व बारिश कम होने की वजह से मौसम का तापमान बढ़ा है। इससे किसानों में चिंता है। हाल के दिनों में बारिश भी कम हुई है।
जानकारी के अनुसार मार्च महीने में इतनी गर्मी कम ही देखने को मिलती है। पिछले साल की बात करें तो अप्रैल तक सर्दियों का असर रहा, इस वजह से फसल बंपर हुई। लेकिन इस बार मौसम में कोई खासा बदलाव नहीं दिखा। वेस्टर्न डिस्टरबेंस भी नहीं हुआ। इस वजह से मार्च में बारिश कम हुई। लिहाजा गर्मी बढ़ गई गर्मी के बढ़ने से आशंका जताई जा रही है कि खेतों में फसल का झाड़ कम होगा।
वैज्ञानिकों के अनुसार मौजूदा समय में नमी मिलने से दाने का साइज पूर्ण होता है और उत्पादन भी ज्यादा होता है। फसल का झाड़ अधिक होने से किसानों को फायदा होता है। लेकिन जो परिस्थितियां बनी हैं, इससे फसल का झाड़ कम होगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक पंजाब में 13-14 अप्रैल के करीब गेहूं की कटाई शुरू हो जाती है, क्योंकि फसल पककर तैयार हो जाती है। हालांकि अभी फसल की कटाई में समय है। ऐसे में अगर मौसम में कुछ नमी रहे तो फसल बेहतर तरीके से पकेगी। लेकिन यदि गर्मी अधिक रही तो फसल का दाना सिकुड़ जाएगा।
बढ़ता तापमान फसल के लिए हानिकारक : डॉ. केके गिल
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग की वैज्ञानिक डॉक्टर केके गिल ने बताया कि मौसम में अधिक गर्मी है। इस वजह से गेहूं के फसल के दाने के सिकुड़ने का खतरा बढ़ गया है। अधिक गर्मी से फसल का दाना पूर्ण साइज नहीं ले पाता है। इस वजह से फसल का झाड़ कम होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि किसान फसल में हलकी सिंचाई करें तो इससे कुछ लाभ मिलेगा।
फसल के नुकसान होने के आसार कम : थिंद
प्लांट ब्रीडिंग विभाग के पूर्व वैज्ञानिक केएस थिंद ने बताया कि मौसम गर्म जरूर हुआ है, लेकिन फसल को अधिक नुकसान होने की संभावना नहीं है।
फसल पर दिख रहा विपरीत असर : नवतेज
लुधियाना के गांव गालिब खुर्द के किसान नवतेज सिंह ने बताया कि अधिक गर्मी से फसल पर विपरीत असर दिखाई दे रहा है। फसल जल्द पकने लगी है, इससे झाड़ कम होगा। लिहाजा किसान डरे हुए हैं। फसल खराब न हो इसलिए वह पीएयू के वैज्ञानिकों की सलाह लेकर खेती कर रहे हैं।