वह पांच फीसदी जीएसटी को किसी तरह अपने मुनाफे से एडजस्ट करते हैं। अब 12 फीसदी को अपने मुनाफे से दे पाना मुश्किल है। वहीं जिन दुकानदारों के पास लाखों रुपये का पुराना स्टॉक पड़ा है, उनके लिये स्टॉक को समायोजित करना मुश्किल हो जायेगा। व्यापारियों का कहना है कि ब्रांडेड कंपनियों पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि उनके ग्राहक क्रीमी लेयर से हैं।
ग्राहक पहले ही कम, अब कैसे चलेगा धंधा
कोरोना महामारी के दौरान हमारा कारोबार पूरी तरह से ठप रहा। अभी तक पुराने नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी है। कारोबारियों के पास लाखों रुपये का स्टाक पड़ा होता है, अब पुराने स्टाक पर पांच फीसदी और नए साल से 12 फीसदी जीएसटी। इस तरह व्यापारी सिर्फ बही खातों में पीस कर रह जाएंगे। पैसे की कमी के चलते पहले ही ग्राहक कम है, अब जीएसटी बढ़ने से कीमतों में इजाफा होने से कौन खरीददारी के लिए निकलेगा। सरकार को आम लोगों के साथ कारोबारियों के लिए कुछ सोचना चाहिए।
- मनप्रीत सिंह बंटी, प्रधान, अकाल मार्केट रेडीमेड एसोसिएशन।
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ब्रांडेड कंपनियों पर नहीं पड़ेगा कोई फर्क
सरकार एक जनवरी से कपड़ों से जीएसटी बढ़ाने जा रही है, इसका असर सबसे ज्यादा मध्यम व छोटे उद्योगो पर पड़ेगा। क्योंकि ब्रांडेड कपड़े के शौकीनों पर सात फीसदी दाम बढ़ने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमारे ज्यादातर ग्राहक मध्यम व निम्न वर्ग से हैं। जिनके लिए कीमतों में सात फीसदी का इजाफा बर्दाश्त करना मुश्किल है। ऐसे ग्राहक बिल नहीं मांगते बल्कि सीधे मोल भाव करते हैं। सरकार को मध्यम व छोटे उद्योगों पर ध्यान देना चाहिए।
- हरदीप सिंह, चेयरमैन अकाल मार्केट रेडीमेड एसोसिएशन