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झटका: नए साल से महंगे हो जाएंगे कपड़े, लुधियाना के कारोबारी बोले- सरकार का फैसला वज्रपात से कम नहीं

Fri, 08 Oct 2021 05:22 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना (पंजाब)

सार

अकाल मार्केट के कारोबारी गुरिंदर पाल सिंह का कहना है कि कोरोना काल के बाद हमारा कारोबार अभी चलना शुरू हुआ है, अब सरकार सीधे सात फीसदी जीएसटी बढ़ा रही है। यह सीधे तौर पर हमारा कारोबार तबाह करने की नीति है। कपड़ा गरीब से लेकर अमीर तक हर वर्ग का व्यक्ति पहनता है। अब उसे ज्यादा दाम चुकाने होंगे। ऐसे में आम लोग इस महंगाई में कैसे अपना काम करेंगे। कारोबारियों के लिए भी यह एक मुसीबत है।
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बाजार में खरीदारी करतीं महिलाएं - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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नये साल के पहले दिन से कपड़े पहनना मंहगा हो जायेगा। जीएसटी परिषद ने एक जनवरी 2022 से रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी को पांच फीसदी से 12 फीसदी करने का फैसला किया है। अब आम लोगों को कपड़े खरीदते समय सात फीसदी ज्यादा दाम चुकाना होगा। सरकार के इस फैसले से ग्राहक ही नहीं बल्कि रेडीमेट गारमेंट कारोबारियों में निराशा है।

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होलसेल कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि अभी वह कोरोना महामारी की मंदी से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। इन हालात में जीएसटी में सात फीसदी का इजाफा वज्रपात से कम नहीं है। लिहाजा कारोबारियों ने सरकार से इस फैसले पर तुरंत रोक लगाकर आम लोगों के साथ कारोबारियों को राहत देने की अपील की। 

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होलसेल कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि केंद्र सरकार ने कपड़े को पहले पांच फीसदी जीएसटी स्लैब में रखा था। वह फैक्टरी से तैयार कपड़े जीएसटी चुका कर खरीदते हैं। उनसे रिटेल कारोबारी माल खरीद कर ले जाते हैं। इसमें 90 फीसदी दुकानदार के पास जीएसटी नंबर नहीं होता और ग्राहक को बिल भी नहीं देते हैं। इस तरह के रिटेलर उन्हें जीएसटी बिना चुकाए माल खरीद कर ले जाते हैं। 

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वह पांच फीसदी जीएसटी को किसी तरह अपने मुनाफे से एडजस्ट करते हैं। अब 12 फीसदी को अपने मुनाफे से दे पाना मुश्किल है। वहीं जिन दुकानदारों के पास लाखों रुपये का पुराना स्टॉक पड़ा है, उनके लिये स्टॉक को समायोजित करना मुश्किल हो जायेगा। व्यापारियों का कहना है कि ब्रांडेड कंपनियों पर कोई असर नहीं होगा क्योंकि उनके ग्राहक क्रीमी लेयर से हैं। 

ग्राहक पहले ही कम, अब कैसे चलेगा धंधा 
कोरोना महामारी के दौरान हमारा कारोबार पूरी तरह से ठप रहा। अभी तक पुराने नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी है। कारोबारियों के पास लाखों रुपये का स्टाक पड़ा होता है, अब पुराने स्टाक पर पांच फीसदी और नए साल से 12 फीसदी जीएसटी। इस तरह व्यापारी सिर्फ बही खातों में पीस कर रह जाएंगे। पैसे की कमी के चलते पहले ही ग्राहक कम है, अब जीएसटी बढ़ने से कीमतों में इजाफा होने से कौन खरीददारी के लिए निकलेगा। सरकार को आम लोगों के साथ कारोबारियों के लिए कुछ सोचना चाहिए। - मनप्रीत सिंह बंटी, प्रधान, अकाल मार्केट रेडीमेड एसोसिएशन।

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ब्रांडेड कंपनियों पर नहीं पड़ेगा कोई फर्क
सरकार एक जनवरी से कपड़ों से जीएसटी बढ़ाने जा रही है, इसका असर सबसे ज्यादा मध्यम व छोटे उद्योगो पर पड़ेगा। क्योंकि ब्रांडेड कपड़े के शौकीनों पर सात फीसदी दाम बढ़ने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हमारे ज्यादातर ग्राहक मध्यम व निम्न वर्ग से हैं। जिनके लिए कीमतों में सात फीसदी का इजाफा बर्दाश्त करना मुश्किल है। ऐसे ग्राहक बिल नहीं मांगते बल्कि सीधे मोल भाव करते हैं। सरकार को मध्यम व छोटे उद्योगों पर ध्यान देना चाहिए। - हरदीप सिंह, चेयरमैन अकाल मार्केट रेडीमेड एसोसिएशन
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