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केजरीवाल से बोले कारोबारी 90 फीसदी समस्याएं वहीं, लेकिन हल करने को कोई तैयार नहीं

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लुधियाना। पंजाब की इंडस्ट्री की तरफ किसी भी सरकार ने पूरी तरह से ध्यान नहीं दिया है। दशकों बाद भी यहां के कारोबारी वहीं पुरानी समस्याओं को खत्म करने की मांग कर रहे है। इंडस्ट्री को सस्ती बिजली देने का वायदे तो बड़े किए पर इसे लागू नहीं किया जा सका है। सरकारों ने फोकल पॉइंट तो बना दिए पर वहां सुविधाओं का अभाव है।
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कुछ इसी अंदाज में बुधवार को लुधियाना पहुंचे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के सामने समस्याओं का खुलासा किया। केजरीवाल में सभी समस्याओं को लिखा और वायदा किया कि उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद कारोबारियों की समस्याओं का पहल के आधार पर हल किया जाएगा।
यूनाइटेड साइकिल पार्ट्स मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन प्रधान डीएस चावला ने कहा कि साइकिल इंडस्ट्री में चाइना नंबर वन पर है जबकि हमारा देश दूसरे नंबर पर है। इसमें लुधियाना की बड़ी भूमिका है।
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पंजाब में न तो साइकिल तैयार करने के लिए कच्चा माल मिलता है और न कोई बंदरगाह है। इसके बावजूद हम चाइना को टक्कर दे रहे हैं। 95 फीसदी साइकिल का उत्पादन बाहर जाता है। हमारी इंडस्ट्री को अच्छा कच्चा माल चाहिए। हम 16 किलो का साइकिल तैयार करते है। हमारी इंडस्ट्री सरकारी टेंडर के सहारे चल रही है।
सरकार हमारी तरफ ध्यान दे तो हम नंबर वन बन सकते है। सीआईसीयू प्रधान उपकारक सिंह आहूजा ने कहा कि पंजाब में इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। बिजली की समस्या का हल तो आज तक नहीं हो सका है। सरकार को चाहिए कि इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए अच्छी पॉलिसी तैयार करे।
तभी हम पंजाब को आगे ले जा सकते है। होटल एसोसिएशन प्रधान अमरवीर सिंह ने बताया कि सरकार ने चाहे होटल कारोबार को इंडस्ट्री का दर्जा दे दिया है, पर उन्हें इंडस्ट्री वाली सुविधाएं नहीं मिल सकी है। बिजली के फिक्स चार्ज इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी समस्या है।
कोरोना काल में पहले होटल बंद हुए सबसे बाद में खुले। लेकिन बिजली के फिक्स चार्ज उन्हें फिर भी भरने पड़े है। फ्रूट एंट वेजिटेबल एसोसिएशन महासचिव गुरप्रीत सिंह ने अपनी इंडस्ट्री का हाल बताते कहा कि उनका सारा कारोबार मंडी बोर्ड के अधीन आता है।
पंजाब सरकार का यह एक ऐसा विभाग है कि जोकि सबसे अमीर है। वह टैक्स देना चाहते है लेकिन उन्हें इज्जत नहीं दी जाती है। इस समय पंजाब में लगभग 150 मंडियां है, लेकिन उनकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।
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