लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में पीएचडी की पढ़ाई कर रहे अफगानी छात्र अहमद जानकारी
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लुधियाना। अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा होते ही लुधियाना की पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (पीएयू) में पढ़ाई कर रहे 14 छात्र खौफ के साये में है, क्योंकि बीते दो दिन से उनका अपने परिवार से संपर्क टूट चुका है। उन्हें नहीं पता कि उनके परिजन जिंदा हैं या नहीं। तालिबान के कब्जे के बाद छात्र अपने घर वापस नहीं लौटना चाहते और भारत में ही रहने की बात कह रहे हैं। तालिबान का खौफ उनके दिलों में कितना है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा सकते है कि ज्यातार छात्र कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं, उन्हें डर है कि अगर वीडियो या फोटो तालिबान के हाथ लगा तो उनका परिवार जिंदा नहीं बचेगा। उनका साफ कहना है कि वहां जाकर रहना मतलब मौत है। क्योंकि बीते 20 साल से वह जिस माहौल में रहना सीख चुके हैं, तालिबान उन्हें किसी हालत में वह कुछ नहीं करने देगा। वह सभी देशों से अपील करते हैं कि अफगानिस्तान में शांति कायम करने के लिए मिलकर कुछ करें।
अफगानिस्तान निवासी छात्र अहमद ने बताया कि पीएयू में इस समय 14 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इसमें आठ छात्र पीएचडी की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि छह अन्य कोर्स में पढ़ रहे हैं। पूरा परिवार अफगानिस्तान में है, जहां माता-पिता सहित कुल आठ लोग हैं। लेकिन बीते दो दिन से मोबाइल पर किसी से संपर्क नहीं हो रहा है। इस समय वह उनके लिए सिर्फ दुआ कर रहा है, उसे नहीं पता कि वह किस हाल में है। उसे सिर्फ इतना पता है कि उसका परिवार घर छोड़ कर किसी सुरक्षित ठिकाने पर जाने के लिए निकला था। अहमद ने बताया कि जब उनकी उम्र नौ साल की थी, उसने तब तालिबान का क्रूर चेहरा देखा था। बीते कुछ साल में सब कुछ बदल गया था। उसकी बहन सरकारी नौकरी करती है, यही नहीं वहां लड़कियां शिक्षा के लिए स्कूल जाती हैं। लेकिन तालिबान को यह पसंद नहीं है। लड़कियां घरों से बाहर नहीं निकल सकतीं, ऐसे में सैकड़ों लड़कियां बेरोजगार हो जाएगी। वहीं स्कूल जाने वाली लड़कियों को घर बैठना होगा।
अभी ज्यादातर युवा टी शर्ट, शर्ट व जींस पहनते हैं, लेकिन तालिबान के कानून के मुताबिक यह नहीं पहना जा सकता है। उन्हें तालिबान के अनुसार कपड़े पहनने होंगे। यहां तक दाढ़ी रखना भी जरूरी है, ऐसा नहीं करने वालों के लिए एक ही सजा है मौत। परिवार को भारत लाने के सवाल पर अहमद कहते हैं कि वह स्कॉलरशिप पर पढ़ते हैं। लेकिन अगर भारत सरकार कुछ ऐसी राहत दे तो वह अपने परिवार को यहां लाकर खुश रहेंगे। लेकिन वापस अफगानिस्तान जाना नहीं चाहते।