फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब : अब सतलुज नदी की सफाई के लिए जुटे लोग, इस शख्सियत ने खुद संभाली जेसीबी की कमान

Mon, 22 Feb 2021 03:49 PM IST
निवेदिता वर्मा महेश कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, सुल्तानपुर लोधी (पंजाब)
विज्ञापन
सतलुज नदी की सफाई के लिए संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने खुद जेसीबी की कमान संभाली है। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन
पंजाब के श्री गुरु नानक देव जी चरणस्पर्श काली बेईं को निर्मल बनाने वाले पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल अब सतलुज की सफाई में जुटे हैं। गांव गिद्दड़पिंडी के बचे दर्रों की सफाई का दूसरा चरण शुरू हो चुका है। संत सीचेवाल ने खुद जेसीबी की कमान संभाल रखी है। अब तक सतलुज नदी में दशकों से जमी मिट्टी के 1000 टिपरों से गिद्दड़पिंडी के खेत-खलिहान ऊंचे किए गए हैं, जिससे अब सतलुज में पानी का बहाव बढ़ने से फसलों पर पानी नहीं फिरेगा।
विज्ञापन


दशकों से पुल के दर्रों में जमा मिट्टी के कारण बरसाती पानी निकलने की सामर्थ्य कम होने पर 2008 और 2019 में बाढ़ की वजह से लोहियां, सुल्तानपुर लोधी और शाहकोट हलके में भारी तबाही हुई थी। दरिया का तल ऊंचा होना, दर्रों में मिट्टी का जमा होना, बांध का कमजोर होना और दरिया के किनारे पर बड़े स्तर पर अवैध कब्जों की भरमार के कारण दर्जनों गांवों के लोगों को बाढ़ का संताप से झेलना पड़ा था। 
विज्ञापन

कोरोना काल में शुरू हुआ था कारसेवा का पहला चरण
दोआबा के इन एरिया को इस मुसीबत से बाहर निकालने के लिए पद्मश्री संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने हाथ आगे बढ़ाया। 2020 के दौरान रेलवे और जिला जालंधर के डीसी की सहमति से गिद्दड़पिंडी पुल के दर्रे साफ करने के लिए कोरोना काल में दिन-रात कारसेवा शुरू की गई। इस पहल के साथ ही सूबे के हर जिले से कारसेवा के लिए लोग उमड़ पड़े, कोई श्रमदान के लिए तो कोई ट्रैक्टर-ट्राली, तेल, आर्थिक मदद करने के आगे आया। कारसेवा के दौरान प्रभावित गांवों के लोगों की जरूरतों का भी खास ध्यान रखा गया।  

दूसरे चरण की सफाई के लिए कारसेवा का दौर चरम पर है। दर्रों के नीचे से निकाली जा रही मिट्टी से इलाके की सांझी जगहों की सूरत बदली जा रही है। गांव गिद्दड़पिंडी के बाशिंदे बताते हैं कि दरिया में जमा फालतू मिट्टी से जहां बाबा जी ने इलाके के बांध मजबूत किए हैं, वहीं उनके गांव के 2 खेतों में बने स्टेडियम को भी ऊंचा किया जा रहा है। इससे पहले ये स्टेडियम में बरसाती पानी से भर जाते थे और खिलाड़ियों को प्रेक्टिस में दिक्कत आती थी। 

मुख्य सड़क के किनारे पुराने छप्पड़ के 2 एकड़ क्षेत्रफल को भी पार्क में तब्दील किया जा रहा है। इस पार्क बनाने के लिए इस छप्पड़ में 15 फुट से भी अधिक मिट्टी डाली जा रही है। अब तक 1000 टिपरों से अधिक मिट्टी से गांव की सांझी जगह में डाली जा चुकी है। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक 50 लाख रुपये से अधिक की मिट्टी डाली जा चुकी है। दूसरे दौर की कार सेवा में अब तक संगत और एनआरआई के सहयोग से 12000 लीटर तेल इस्तेमाल हुआ है, कारसेवा में 3 बड़ी मशीनें, 2 जेसीबी और 13 टिपर दिन-रात लगी हैं। मालवा के गांवों में से भी बड़ी संख्या में युवा ट्रैक्टर-ट्रालियों समेत कारसेवा में शामिल हो रहे हैं। 


 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें