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होटल में बेची जा रही थी स्कूल की कापी-किताबें, विधायक ने की छापामारी

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जालंधर। पंजाब सरकार की तरफ से स्कूलों को फरमान जारी किया गया था कि वह स्कूलों में किसी प्रकार की कापी-किताब या अन्य सामान लेने के लिए विद्यार्थियों को मजबूर नहीं करेंगे। सरकार के इस फैसले के बाद कुछ स्कूल वालों ने कापी-किताबें मंहगे दाम में बेचने के लिए दूसरा तरीका अपना लिया है। अब स्कूल वाले किसी अन्य जगह पर विद्यार्थियों के माता-पिता को बुलाकर उन्हें मंहगे दाम पर स्कूल की कापी किताबें खरीदने पर मजबूर कर रहे हैं।
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ऐसा ही एक मामला जालंधर में भी सामने आया है। जालंधर के सोढल रोड स्थित होटल ईशान में एक स्कूल की कापी-किताबें मंहगे दाम पर बेची जा रही थी। इस बात की शिकायत जैसे ही सेंट्रल हलके से विधायक रमन अरोड़ा को मिली तो उन्होंने उक्त होटल पर दबिश दे दी। इसके बाद विधायक ने देखा कि एक व्यक्ति सेठ हुकम चंद स्कूल की कापी-किताबें महंगे दाम पर बेच रहा था। विधायक रमन अरोड़ा ने मौके से सेठ हुकम चंद स्कूल के नाम से प्रिंटेड कॉपियां बरामद कर ली हैं। विधायक रमन अरोड़ा ने जब वहां पर मौजूद बच्चों के अभिभावकों से बात की तो उन्होंने स्कूल प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी। अभिभावकों ने बताया कि स्कूल की तरफ से उन्हें कहा गया था कि वह होटल ईशान में जाकर कॉपी व किताबें खरीदें। इस होटल के अलावा उन्हें कहीं से भी कापी-किताबें नहीं मिलेंगी। हैरानी की बात यह है कि इस होटल में एक नहीं बल्कि 4 स्कूलों की किताबें बिक रही थी।
इस दौरान विधायक रमन अरोड़ा ने कहा कि निजी स्कूल के मालिक लगातार अभिभावकों को परेशान कर रहे हैं। सीएम भगवंत मान के निर्देशानुसार वह यहां चेक करने आए थे, जिसमें स्कूल प्रबंधन की पोल खुल गई। यहां पर मनमाने दाम पर कॉपी व किताबें बेची जा रही थी। आप सरकार ने कहा है कि लोग कहीं से भी किताबें खरीद सकते हैं, लेकिन 60 से 70 रुपये वाली किताबें लोगों को 350 रुपये में बेची जा रही हैं। मौके पर शिक्षा विभाग व प्रशासनिक अधिकारियों को बुलाकर शिकायत दर्ज करवा दी है। उन्होेंने कहा कि अगर किसी स्कूल वाले ने शिकायतकर्ता के बच्चों के खिलाफ कोई कार्रवाई की तो वे उन स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।
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10 किताबें लगी, 10 ही अलग-अलग पब्लिशर की
अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने स्कूल को कहा कि किताबों की लिस्ट दे दें, लेकिन लिस्ट नहीं दी गई। उन्हें कहा गया कि यह किताबें किसी भी जगह नहीं मिलेंगी। लोगों ने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि अगर बच्चे को 10 किताबें लगी हैं तो वह 10 किताबें ही अलग-अलग पब्लिशर की हैं। बाहर से किताबें मिलना बहुत मुश्किल हो जाता है, जिससे मजबूरी में उन्हें स्कूल वालों से किताबें लेनी पड़ती हैं।
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